भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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त्रयोविंशोऽध्यायः १२१

पुण्यं महापवित्रं तु स्नाने दाने तथा जपे।
विदित्वा चास्य माहात्म्यं सर्वदेवसमागमम्।
ध्यात्वा श्रुत्वा पठित्वा च सर्वपापैः प्रमुच्यते॥३८॥

इति श्रीसाम्बपुराणे राहुग्रहणविचारो नाम त्रयोविंशतितमोऽध्यायः

स्नान, दान तथा जपविशेष के लिये ग्रहणकाल अत्यन्त महापुण्यमय तथा पवित्र समय होता है। सभी देवता इस समय एकत्र होते हैं और इसका माहात्म्य जानकर ध्यान करते हैं, श्रवण करते हैं तथा पाठ करते हैं और समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं।।३८।।

श्रीसाम्बपुराण में राहुग्रहणविचार नामक त्रयोविंश अध्याय समाप्त