साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१३४ श्रीसाम्बपुराणम्
'ऐसा ही हो' कहकर सूर्य का आदेश ग्रहण करके साम्ब रमणीय कान्तियुक्त होकर द्वारका जाकर कृष्ण से अपनी सूर्यदर्शन की बातें बताई और उनसे गरुड़ को प्राप्त करके उसपर आरोहण कर साम्ब चल दिये॥४०-४१॥
शाकद्वीपमनुप्राप्य सम्प्रहृष्टतनूरुहः ।
तत्रापश्यद् यथोद्दिष्टान् साम्बस्तेजस्विनो मगान् ॥४२॥
शाकद्वीप में पहुँचकर प्रहृष्ट एवं रोमाञ्चित कलेवर वाले साम्ब ने यथाकथित मग (ब्राह्मणों) को देखा॥४२॥
विवस्वन्तं पूजयतो धूपगन्धादिभिः शुभैः ।
अभिवाद्य तु तान् सर्वान् कृत्वा चैव प्रदक्षिणाम् ॥४३॥
पृष्ट्वा ह्यनामयं तेषां श्लाघयामास तांस्ततः ।
यूयं हि पुण्यकर्माणो द्रष्टव्याश्च शुभार्थिभिः ॥४४॥
वे मंगलमय धूप तथा गन्धादि से सूर्य का पूजन कर रहे थे। उन सबका अभिवादन तथा प्रदक्षिणा करके साम्ब ने उनकी कुशलता पूछकर उनकी प्रशंसा करते हुये कहा कि आप पुण्यकर्मा एवं शुभाकांक्षी प्रतीत हो रहे हैं॥४३-४४॥
यो रतोऽर्कस्य पूजायां तस्य चैव वरप्रदः ।
तनयं विद्धि मां विष्णोर्नाम्ना साम्ब इति श्रुतः ॥४५॥
जो सूर्य को पूजा करते हैं, उनके लिये आप वर देने वाले हैं। आप लोग मुझे विष्णु (कृष्ण)-पुत्र साम्ब जानें॥४५॥
चन्द्रभागातटे चापि मया सूर्यो निवेशितः ।
तेनाहं प्रेषितश्चात्र उत्तिष्ठध्वं व्रजामहे ॥४६॥
मैंने चन्द्रभागा के तट पर सूर्य की प्रतिमा स्थापित की है। उन्होंने ही मुझे यहाँ भेजा है। आप उठिये, हम वहाँ जायँ॥४६॥
ते तमूचुस्ततः साम्बमेवमेतन्न संशयः ।
अस्माकमपि देवेन व्याख्यातं पूर्वमेव हि ॥४७॥
तब उन्होंने साम्ब से कहा कि ऐसा ही सूर्यदेव ने हमसे भी पहले कहा था, इसमें कोई संशय नहीं है॥४७॥
अष्टादशकुलानीह मगानां वेदवादिनाम् ।
यास्यन्ति च त्वया सार्धं यत्र सन्निहितो रविः ॥४८॥
यहाँ से वेदज्ञ मग ब्राह्मणों के अट्ठारह परिवार आपके साथ वहाँ जायेंगे, जहाँ सूर्यदेव की प्रतिमा सन्निहित है॥४८॥