भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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पृष्ठ 145

षड्‌विंशोऽध्यायः १३५

स तु गृह्य ततस्तानि दश चाष्टौ कुलानि च।
आरोप्य गरुड़े साम्बस्त्वरितं पुनरभ्यगात् ॥४९॥

तदनन्तर साम्ब ने उनके अट्ठारह वंश ब्राह्मणाकुल को गरुड़ पर बैठाया और शीघ्र लौट आये।।४९।।

सपुत्रदारसंयुक्तो पूजा यज्ञाय चागतः ।
सोल्पेऽनैव तु कालेन प्राप्तो मित्रवनं पुनः ॥५०॥

वे स्त्री-पुत्रादि के साथ पूजा तथा यज्ञार्थ आये। उनके साथ साम्ब अत्यल्प काल में ही मित्रवन लौट आये।।५०।।

कृत्वाज्ञां तां रवेः साम्बो यत्कृतं तन्न्यवेदयत् ।
रविः शोभनमित्युक्त्वा प्रसन्नः साम्बमब्रवीत् ॥५१॥
मम पूजाकरा ह्येते प्रजानां शान्तिकारकाः ।
मम पूजां विधानोक्तां करिष्यन्ति मनोऽनुगाम् ।
मत्कृते च पुनश्चिन्ता न ते काचिद्भविष्यति ॥५२॥
इति श्रीसाम्बपुराणे मगानयनं नाम षड्विंशोध्यायः

साम्ब ने सूर्य की आज्ञा का पालन कर लिया—यह उन्होंने सूर्य को बताया। सूर्यदेव ने कहा—‘ठीक है’ और प्रसन्नता-पूर्वक साम्ब से कहा—ये मेरे पूजक हैं। प्रजा के लिये शान्तिकारक हैं। ये यथाविधान साभिलाष होकर मेरा पूजन करेंगे। मेरे पूजनार्थ तुमको कोई चिन्तन नहीं करना होगा।।५१-५२।।

श्री साम्बपुराण में मगानयन नामक षड्विंश अध्याय समाप्त