भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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१४२ श्रीसाम्बपुराणम्

तत्त्वविद् इस चतुर्थ स्थान को परमात्मा देवदेव सूर्य का स्थान कहते हैं। तत्त्वज्ञ द्वितीय स्थान को भानु का द्वितीय स्थान कहते हैं। उसे मनुष्यों को मोक्ष देने वाला जानना चाहिये। वह स्थान संसार को विच्छिन्न करने वाला है। याजक शास्त्र का अवलम्बन लेकर इन ऋषियों (मग ब्राह्मणों) का चरित्र तुमसे कहा। इसे जान लेने पर मोक्षविद् होना सम्भव है और सिद्धि प्राप्त करके उस स्थान को प्राप्त करना सम्भव हो जाता है।।२२-२३।।

इदममृतसमं परस्य वेद्यं किरणसहस्रभृतो हितं जनानाम्।
ऋषिचरितं वीक्ष्य तत्त्वसारं व्यपगतमोहधियः प्रयान्ति मोक्षम् ॥२४॥
महत् प्रोक्तमिदं ज्ञानं देयं श्रद्धावतां नृणाम्।
नास्तिकानामबुद्धीनां न देयं भूतिमिच्छता ॥२५॥

इति साम्बपुराणे मोक्षज्ञानं नामाष्टाविंशोऽध्यायः

यह अमृततुल्य, सहस्र किरणधारी, परतत्त्व सूर्य का ज्ञापक, जनगण का हितकारक तत्त्वसार है। जिनकी मोह बुद्धि ऋषियों का चरित्र देखकर अपगत हो गयी है, वे इसके द्वारा मोक्ष-लाभ करते हैं। इस ज्ञान को जो महत् द्वारा उक्त है, श्रद्धालु जन को ही देना चाहिये। ऐश्वर्यकामी, नास्तिक बुद्धि तथा मूढ़ को यह ज्ञान कदापि नहीं देना चाहिये।।२४-२५।।

श्री साम्बपुराण का मोक्षज्ञान नामक अष्टाविंश अध्याय समाप्त