भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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१४६ श्रीसाम्बपुराणम्

सूर्यमण्डल के बाँयें तथा दाहिने अर्घ्य देने का स्थान रखना होगा। उदय काल में दाहिनी ओर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिये। अस्तकाल में बायीं ओर अर्घ्यदान करना चाहिये। देवगृह के समक्ष चतुरस्र तथा चतुःशृङ्ग बनाना चाहिये।।२२-२३।।

दिण्डिः स्थाप्यः पुरस्तस्मादादित्याभिमुखस्तथा।
एष स्थानविधिः प्रोक्तो देवानान्तु यथाक्रमम् ॥२४॥
इति श्रीसाम्बपुराणे प्रतिमालक्षणं नामैकोनत्रिंशोऽध्यायः

प्रतिमापाद सूत्र द्वारा मध्य में मण्डल करे। उसके समक्ष सूर्य के अभिमुख दिण्डी की स्थापना करनी चाहिये। इस प्रकार देवगण का यथाक्रम से अवस्थान का प्रकार कहा गया।।२४।।

श्रीसाम्बपुराण में प्रतिमालक्षण नामक उनत्रिंश अध्याय समाप्त