साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 161, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्रिंशोऽध्यायः १५१
गुड़वर्णस्तु पाषाणः कपिले गृहगोधिका।
अग्निवर्णे जलं ज्ञेयं मञ्जिष्ठाभे भवेत् कृमिः ॥३०॥
दोषैरेतैर्विनिर्मुक्तं दारुश्रेष्ठमुदाहरेत्।
प्रक्षाल्य पल्लवैः सम्यक् क्वचित् कालं विधारयेत् ॥३१॥
इति श्रीसाम्बपुराणे प्रतिष्ठापनकल्पे दारुपरीक्षा नाम त्रिंशत्तमोऽध्यायः
ऐसे चिह्न वाले वृक्ष को सगर्भ जानना चाहिये। पीतवर्ण मण्डल होने से गोधा (गोसांप), कृष्णवर्ण होने से दीर्घ सर्प, गुड़वर्ण होने से पाषाण, कपिल वर्ण होने से गृहगोधिका (छिपकिली), अग्निवर्ण होने से जल एवं रक्ताभ होने से कृमि रहते हैं। इन सब दोषों से रहित वृक्ष को ही श्रेष्ठ वृक्ष कहा गया है। पत्र के द्वारा अच्छी तरह धोकर काष्ठ को कुछ दिन रखना पड़ता है॥२९-३१॥
श्रीसाम्बपुराण में दारुपरीक्षा नामक त्रिंश अध्याय समाप्त