साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंएकत्रिंशोऽध्यायः १५५
तस्माद् भास्करभक्तेन लोकद्वयहितैषिणा।
नातिलोक्या न चालोक्य ऋज्वी मूर्त्तिः प्रशस्यते॥२३॥
ता मूर्त्तयः शुभा कार्यास्तदधीनास्तु सम्पदः।
शिरोरुगण्डवदनैः सर्वाङ्गावयवैस्तथा।
एवं लक्षणसम्पूर्णा सा शुभा प्रतिमा नृणाम्॥२४॥
इति श्रीसाम्बपुराणे प्रतिमालक्षणं नामैकत्रिंशोऽध्यायः
जो अत्यन्त उज्ज्वल न हो, निष्प्रभ भी न हो, ऐसी सरल प्रतिमा प्रशंसनीय होती है। अतएव इस लोक के तथा परलोक के हिताकांक्षी सूर्यभक्त को शुभ मूर्ति स्थापित करनी चाहिये। उससे सम्पत्ति मिलती है। मस्तक-ऊरु-गण्ड-वदन प्रभृति सभी अवयवविशिष्ट सम्पूर्ण लक्षणयुत प्रतिमा शुभप्रद होती है॥२३-२४॥
श्रीसाम्ब पुराण का प्रतिमालक्षण नामक एकत्रिंश अध्याय समाप्त