भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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द्वात्रिंशोऽध्यायः १५९

सुवर्णमधुपर्कादि सुमनोदीपधूपकैः । देवाय स्पर्शयेद् गाञ्च सवत्सां रोहिणीं शुभाम् ॥१२४॥

स्वर्ण-मधुपर्कादि, पुष्प, धूप, दीप को देवता के उद्देश्य से निकालकर शुभ सवत्सा लाल गाय का स्पर्श (देवता को) कराये। उस समय यह मन्त्र पढ़ना चाहिये॥१२४॥

ॐ नमो गोपतये इत्युक्त्वा सहस्त्रांशो प्रसीदयेत् । एवम् मन्त्रेण सम्पूज्य परिधाय च वाससी ॥१२५॥

हे गोपते (सूर्य)! आपको नमस्कार है। हे सहस्त्रांशु! मुझपर प्रसन्न हो जाईये। इस मन्त्र से पूजा करके उनको वस्त्रद्वय पहनाये॥१२५॥

यज्ञोपवीतमावेष्ट्य बद्धोत्सङ्गस्तथैव च। सर्वगन्धैः समालिप्य चन्दनागुरुकुङ्कुमैः ॥१२६॥

उन्हें यज्ञोपवीत धारण कराकर (यज्ञोपवीत से आवेष्टन करके) तदनन्तर चन्दन, अगुरु, कुङ्कुम प्रभृति गन्ध का लेपन करे॥१२६॥

अलङ्कारैरलङ्कृत्य कुसुमैश्च सुगन्धिभिः । मालाभिश्च विचित्राभिरबद्धाभिरनेकशः ॥१२७॥

तत्पश्चात् विविध अलङ्कारों से अलंकृत करके सुगन्धि, कुसुम तथा अनेक विचित्र मालाओं को पहनाये॥१२७॥

ततो धूपं च नैवेद्यं दद्याच्चैव प्रयत्नतः । तत्तोरणं समुत्थाप्य मणेः शौरदयो धिया ॥१२८॥

तत्पश्चात् अनेक यत्न द्वारा धूप एवं नैवेद्य निवेदित करना चाहिये। तदनन्तर अकालोदित (अकाल में उगे) इन्द्रधनुष का (मणि का) चिन्तन करते हुये तोरण को उत्तोलित करे॥१२८॥

प्रज्वाल्यग्निं विधानेन कुर्याच्छान्तिं विधानतः । ततः स्वलङ्कृतां स्नातां मणिरत्नविभूषिताम् ॥१२९॥ कृत्वा प्रतिष्ठितां रक्षां प्रतिमामधिवासयेत् ॥१३०॥

विधान के अनुसार अग्नि प्रज्वलित करके यथाविधि शान्तिदान करे। तदनन्तर स्नात, अलंकृत, मणिरत्नादि से विभूषित प्रतिष्ठित प्रतिमा का अधिवास कराये॥१२९-३०॥

देवागारात्तथैश्याने दिग्भागे दिव्यसंज्ञिते । कृत्वा कुशपरस्तीर्णे वरास्तरणसंवृते । पूर्वशीर्षां शुभां शय्यां शुक्लां शुक्लाम्बरोत्तमाम् ॥१३१॥