भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

पृष्ठ 170, कुल 424 में से

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पृष्ठ 170
१६०श्रीसाम्बपुराणम्

तस्यां संवेशयेत् सम्यङ् महाश्वेतामुदीरिताम्।
निक्षुभां दक्षिणे पार्श्वे वामे राज्ञीं च स्थापयेत् ॥३२॥
तदनन्तर देवमन्दिर में ईशान कोण में दिव्यनाम स्थान में कुश बिछाकर सुन्दर आस्तरण पर पूर्व की ओर मस्तक (मुख) करके (ताकि पैर पश्चिम की ओर रहे) शुभ्र वस्त्रों की उत्तम शय्या बनानी चाहिये। इस शय्या पर प्रसिद्ध महाश्वेता की स्थापना करनी चाहिये एवं उसके दाहिनी ओर निक्षुभा तथा बाँयीं ओर राज्ञी की स्थापना करनी चाहिये।।३१-३२।।

दण्डपिङ्गलकौ चास्य स्थाप्यौ पादप्रवेशितौ।
तस्यां शङ्खसितायां तु शय्यायां प्रतिमां रवेः ॥३३॥
पाद-प्रदान (पैर रखने के) स्थान पर दण्ड तथा पिङ्गल को स्थापित करना चाहिये। उस शङ्ख के समान शुभ्र शय्या पर सूर्यप्रतिमा की स्थापना करनी चाहिये।।३३।।

वसेच्च रजनीं तत्र स्तूयमानं चतुर्दिशम्।
ब्राह्मणैर्वन्दिभिश्चापि गीतज्ञैर्वरणैस्तथा।
कुर्याज्जागरणं तत्र सूर्यभक्तिसमन्वितैः ॥३४॥
वहाँ पूजक को रात में रहना चाहिये। चारो ओर से ब्राह्मण, बन्दीगण, वृत गीतज्ञ स्तव करते रहें तथा सब सूर्य के प्रति भक्तियुक्त होकर रात्रि-जागरण भी करें।।३४।।

प्रभातायां तु शर्वर्यां बोधयेद् दिग्विधानतः।
हविष्यं भोजयित्वा तु ब्राह्मणाम् याजकांस्तथा ॥३५॥
दक्षिणाभिश्च सम्पूज्य कृते वै स्वस्तिवाचने।
दीनान्धकृपणादींश्च सर्वानन्नेन तोषयेत् ॥३६॥
तत्पश्चात् प्रभात होने पर विधिपूर्वक प्रतिमा को जगाये। ब्राह्मण तथा याजकों को हविष्य भोजन कराकर स्वस्तिवाचन के साथ दक्षिणादि द्वारा उनकी पूजा करे। तदनन्तर दीन-अन्ध-कृपण प्रभृति सबको अन्न से परितुष्ट करना चाहिये।।३५-३६।।

ततो गर्भगृहस्यानमध्ये कृत्वा तु पिण्डिकाम्।
अवटे चास्य सौवर्णं न्यस्य सप्तहयं रथम्॥३७॥
सर्वबीजौषधींश्चैव तत्र दत्त्वा विधानवित्।
दत्तार्घ्यं स्थापयेत्तत्र यजमानं सहायवान् ॥३८॥
गौरांश्च सर्षपान् दत्त्वा अर्चां संस्थापयेत्ततः।
शङ्खदुन्दुभिनिर्घोषैर्हस्ताधारासहाक्षतैः ॥३९॥
तदनन्तर गर्भगृह में पिण्डिका को प्रस्तुत (रख) करके उस गर्भ गृह में स्वर्ण तथा सप्ताश्व रथ स्थापित करे। तत्पश्चात् विधान को जानने वाला यजमान अन्य की सहायता

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