साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 171, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वात्रिंशोऽध्यायः १६१
से वहाँ सर्व बीजौषधि से युक्त अर्घ्य प्रदान करके उसे स्थापित करे। तदनन्तर श्वेत सरसों अर्पित करके (नीचे रखकर) वहाँ प्रतिमा स्थापित करनी चाहिये। तदनन्तर शङ्ख-दुन्दुभि आदि के शब्द के साथ हाथों से चावल छिड़कना चाहिये।।३७-३९।।
कृत्वा पुण्याहशब्देन स्वालयस्य प्रदक्षिणाम्।
शुभे लग्ने दिने ऋक्षे पूर्वाह्णे भानवेक्षणे।
मुहूर्त्ते च शुभे भानोः प्रतिमां स्थापयेद् बुधः ॥४०॥
तदनन्तर पुण्याह शब्दों द्वारा देवगृह की प्रदक्षिणा करे। शुभ लग्न में शुभ दिन तथा नक्षत्र में पूर्वाह्न काल में, सूर्यालोक (सूर्य के प्रकाश) में शुभ मुहूर्त में ज्ञानी व्यक्ति को सूर्य प्रतिमा का स्थापना कार्य करना चाहिये।।४०।।
नाधोमुखीं नोर्ध्वमुखीं न पार्श्वाननतां तथा।
समामभिमुखीं चेमां प्रतिमां च निवेशयेत् ॥४१॥
प्रतिमा निम्नमुखी अथवा ऊर्ध्वमुखी नहीं होनी चाहिये। सामने की ओर प्रतिमा का मुख हो, ऐसी स्थापना करनी चाहिये।।४१।।
पत्न्यौ चास्य ततः सम्यक् पार्श्वयोर्विनिवेशयेत्।
निक्षुभां दक्षिणे पार्श्वे रवे राज्ञीं तु वामतः ॥४२॥
तत्पश्चात् सूर्य की दोनों पत्नियों को विधान के अनुसार सूर्य के पार्श्व में स्थापित करना चाहिये अर्थात् दाहिनी ओर निक्षुभा तथा बाँयीं ओर राज्ञी की स्थापना करे।।४२।।
पिङ्गलो दक्षिणे भानोर्वामतो दण्डनायकः।
स्थाप्य चैव ततो वह्निं संस्थाप्य विधिवत् पुनः ॥४३॥
सूर्य के दाहिनी ओर पिङ्गल तथा बाँयीं ओर दण्डनायक की स्थापना करनी चाहिये। तदनन्तर पुनः विधिपूर्वक वह्नि-स्थापना करनी चाहिये।।४३।।
यजमानस्य शान्त्यर्थं शान्तिकर्म विधानवित्।
होमयेत् सर्वदेवानां स्वाहाकारैरितस्ततः ॥४४॥
यजमान की शान्ति के लिये शान्तिकर्म में निपुण पुरोहित द्वारा स्वाहायुक्त मन्त्रों से चारो ओर समस्त देवताओं का होम करना चाहिये।।४४।।
ततस्तदुपहारार्थं सम्भारैः प्राक्समाहृतैः।
मोदकोल्लापिकापूपशष्कुलीभूतशीर्षकैः ॥४५॥
कृशरैः पायसोन्मिश्रैः सर्वदिक्षु क्षिपेद् बलिम्।
तर्पयेत् क्षीरमध्वाज्यैः स्तूयात् स्तोत्रैश्च भास्करम् ॥४६॥
साम्ब०—११