भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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पृष्ठ 177

त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः १६७

उद्दिश्य लोकपालेभ्यो बलिं दद्यात्तु पायसम्।
ब्राह्मणान् स्वस्तिवाच्याथ कृत्वा पुण्याहमङ्गलम् ॥१५॥
वादित्रकृतनिर्घोषं जयशब्देन सङ्कुलम्।
शुभे लग्ने दिने ऋक्षे ध्वजमारोपयेद् बुधः ॥१६॥

तदनन्तर कृसर (खिचड़ी), अपूप (माल पूआ) प्रभृति से बलि प्रदान करे। मांस का तैयार खाद्य, दधि, पायस, मोदक आदि से लोकपालों के उद्देश्य से वायु को बलि प्रदान करना चाहिये। तदनन्तर ब्राह्मणगण स्वस्तिवाचन तथा पुण्याह मंगलाचरण करें। तब वाद्य ध्वनि तथा जयशब्द करें। शुभ लग्न, शुभ दिन तथा नक्षत्र का विचार करके विज्ञजन ध्वजारोहण करें ॥१४-१६॥

एवमारोपयेद्यस्तु ध्वजं देवालयोपरि।
श्रिया संवर्धते नित्यं प्राप्नोति च शुभां गतिम् ॥१७॥

इस प्रकार देवमन्दिर के ऊपर जो ध्वजारोहण करते हैं, दिनो-दिन उनका ऐश्वर्य वर्द्धित होता है और उनको शुभ गति मिलती है॥१७॥

न सुरा वस्तुमिच्छन्ति ध्वजहीने सुरालये।
मन्त्रस्तु स्थापने प्रोक्तो विधानज्ञैर्ध्वजस्य तु ॥१८॥

ध्वजारहित मन्दिर में देवता निवास नहीं करते। विधानज्ञ व्यक्ति को ध्वजा-स्थापनार्थ नीचे लिखे मन्त्र को पढ़ना चाहिये॥१८॥

एह्येहि भगवन्नीश विनिर्मिता परिचरवायु सार्धनुसारिणा।
श्रीकरश्रीनिवासरिपुध्वंसकारिन् पक्षिनिलयसर्वदेवता।
सततं कुरु सान्निध्यं शान्तिं स्वस्त्ययनं च मे भवतु।
सर्वविघ्ना अपसरन्तु स्वाहा ध्वजारोपणमन्त्रोऽयम् ॥१९॥

इति श्रीसाम्बपुराणे ध्वजारोपणं नाम त्रयस्त्रिंशत्तमोऽध्यायः

हे भगवन्! ईश्वर! आईये। ध्वजारोहण हो रहा है। आप वायु के साथ विचरण करें। आप के श्रीकर में लक्ष्मी का वास है। हे शत्रुध्वंसकारिन्! पक्षिगण के आश्रय देवतागण! आप नित्य सन्निहित हों। मुझे शान्ति तथा मंगल प्राप्त हो, समस्त विघ्न दूरीभूत हो जायँ। स्वाहा! यह ध्वजारोहण मन्त्र है॥१९॥

श्रीसाम्ब पुराणान्तर्गत ध्वजारोपण नामक त्रयस्त्रिंश अध्याय समाप्त