भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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१६६ श्रीसाम्बपुराणम्

ध्वजा के आगे देवता-चिह्नसूचक रौप्य, स्वर्ण, मणि, रत्नमय अथवा रंग से अंकित वाहन के समान (जिस देवता का ध्वज हो, उसके वाहन की) आकृति तैयार करनी चाहिये। जैसे विष्णु की ध्वजा में गरुड़, महादेव की ध्वजा में वृष आदि की आकृति बनानी चाहिये॥६-७॥

ब्रह्मणः पङ्कजं कार्यं रवेर्व्योम स्मृतं ध्वजे।
हंसो जलाधिपस्योक्तो धनदस्य नरो ध्वजे ॥८॥

ब्रह्मा की ध्वजा में पद्म, सूर्य की ध्वजा में आकाश चिह्न, वरुण की ध्वजा में हंस एवं, कुबेर की ध्वजा में मनुष्य का अंकन करना चाहिये॥८॥

मयूरः कार्तिकेयस्य हेरम्बस्य च मूषकः।
कुञ्जरो देवराजस्य यमस्य महिषो ध्वजे ॥९॥

कार्तिकेय की ध्वजा में मयूर, गणेश की ध्वजा में मूषक, देवराज इन्द्र की ध्वजा में हाथी तथा यम की ध्वजा में भैंसा अङ्कित करना चाहिये॥९॥

सिंहो ध्वजे तु दुर्गाया इत्येषा ध्वजकल्पना।
यस्य यो वाहनः प्रोक्तो ध्वजस्तस्य स एव तु ॥१०॥

दुर्गा की ध्वजा में सिंह—यह है ध्वजा-कल्पना। जिसका जो वाहन निश्चित है, वही उसकी ध्वजा में अंकित होता है॥१०॥

ततः सर्वौषधीभिस्तु स्नापयित्वा प्रयत्नतः।
समालभ्य च बध्नीयान् मध्ये प्रतिसरन्ततः ॥११॥

तदनन्तर सयत्न सर्वौषधि द्वारा स्नान कराकर उसे बीच से बाध देना (बाँस में) चाहिये॥११॥

कल्पयित्वा शुभां वेदीं कलशैरुपशोभिताम्।
तस्यां वेद्यां समारोप्य तां रात्रिमधिवासयेत् ॥१२॥

तत्पश्चात् वेदी का निर्माण करे। उसमें शोभित कलश की स्थापना करे और उस रात्रि वहीं (जागते हुये) अधिवास करे॥१२॥

नानाकुसुमचित्रैश्च स्रजस्तस्यां च लम्बयेत्।
अभ्यर्च्य वै प्रयत्नेन धूपमस्मै निवेदनम् ॥१३॥

तत्पश्चात् उसके ऊपर नानावर्ण के विचित्र पुष्पों की माला लटकाकर यत्नपूर्वक अर्चना करके धूप-निवेदन करे (अर्पण करे)॥१३॥

बलिकर्म ततः कुर्यात् कृसरा-पूपकादिभिः।
पललोल्लिपिकाभिश्च दधि-पायस-मोदकैः ॥१४॥