साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसप्तत्रिंशत्तमोऽध्यायः १८९
ततो भूमौ निषण्णेन जानुना सुसमाहितः ।
पाणी तु पुटकौ कृत्वा प्रणमेज्जातवेदसम् ॥१८॥
आह्वानं तु ततः कृत्वा रवेस्तत्र समाहितः ।
पुराणोक्तेन मन्त्रेण ह्यनेनाथ कृताञ्जलिः ॥१९॥
तदनन्तर कुश की अंगूठी तैयार करके (पवित्री तैयार करके) अग्नि के दक्षिण पार्श्व में (कुश द्वारा) ब्रह्मा के शरीर की कल्पना करनी चाहिये। सुच, स्रुवा, प्रणीता, घृतपात्र का प्रक्षालन करके अग्नि का स्पर्श कराये तथा स्रुव का घृत से स्पर्श कराये। तदनन्तर भूमि पर जानु रखकर बैठकर समाहित होकर हाथ जोड़कर अग्नि को प्रणाम करना चाहिये। तत्पश्चात् समाहित होकर सूर्यदेव का आह्वान करके कृताञ्जलि होकर नीचे लिखा मन्त्र पढ़ना चाहिये॥१६-१९॥
नमो नमो यो भवतीह शश्वदुत्तिष्ठमानो जगतो हिताय ।
आवाहयाम्यद्य तमीशमाद्यं करोतु सोऽग्नाविह सन्निधानम् ॥२०॥
एहोहि सूर्याक्षयविश्वमूर्ते अविन्ध्यनोऽग्नेः शुचिनामधेयः ।
इमां स्वकीयां तनुमाविशस्व हविर्हुतं देवमथा समीक्ष्य ॥२१॥
जो निरन्तर जगत के हितार्थ सन्नद्ध हैं, उन्हें नमस्कार है, नमस्कार है। उन आद्य ईश्वर का मैं आज आह्वान करता हूँ। वे इस अग्नि में सन्निहित हो जायँ। हे सूर्य! आप अक्षय, विश्वमूर्ति हैं, आईये। आप शुचि नामक अग्नि की प्रतिमूर्ति हैं। हे देव! मैं अग्नि में आहुति दे रहा हूँ। यह देखकर आप अपने इस निज शरीर में प्रविष्ट हो जाईये॥२०-२१॥
एवं कृत्वाग्निसंस्कारं साह्वानं च दिवाकरम् ।
ततो विज्ञापयेदग्निमृचमेतामुदाहरेत् ॥२२॥
इस प्रकार से अग्नि का संस्कार करके तथा सूर्यदेव का आवाहन करके अग्नि की प्रर्थना करे तथा नीचे लिखे ऋक् मन्त्र का उच्चारण करे॥२२॥
ममागने वर्चो विहवेष्वस्तु वयं त्वेन्धानास्तन्वं पुषेम ।
मह्यं नमस्तां प्रदिशश्चतस्त्रस्त्वयाध्यक्षेण पृतना जयेम ॥२३॥
उत्तिष्ठ पुरुषर्षभहरिपिंगलदीप्तजिह्व
लोहिताक्ष देहि मे ददामि ते स्वाहा ॥२४॥
हे अग्नि! हमारा तेज........प्रसरित हो। यज्ञकारी हम आपके तनु का पोषण करेंगे। आपके अध्यक्षरूप से होने पर चारो ओर के लोग हमसे अवनत होंगे और हमारी जय शत्रुसेना पर होगी। हे पुरुषश्रेष्ठ! हरित एवं पिङ्गल वर्ण दीप्त जिह्वा वाले! आप उठिये। हे लोहिताक्ष! हमें दीजिये। हम आपको स्वाहा मन्त्र से आहुति दे रहे हैं॥२३-२४॥