भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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१९० श्रीसाम्बपुराणम्

ततः परमग्निहोत्रमन्त्रेण मार्गमुच्चरन् परमाहुतिं दद्यादादाय स्वाहा ॥२५॥

तत्पश्चात् अग्निहोत्र मन्त्र का उच्चारण करके स्वाहा शब्द लगाकर पुण्याहुति प्रदान करनी चाहिये॥२५॥

तथैव च यत्र आत्मीये म त्विषासहिताय च।
ततः प्रादेशमात्राभिः पलाशोभिर्यथाविधि ॥२६॥
देवदारुमयीभिश्च शमीमयीभिरेव च।
समिद्भिश्च घृताक्ताभिर्होमयेज्जातवेदसम् ॥२७॥
रत्निमात्रं स्रुवं गृह्य घृतेनैव तु होमयेत्।
ततः क्षीरेण गव्येन ततोऽन्नेन च होमयेत् ॥२८॥

इस प्रकार से यज्ञ में त्विषा के साथ आधा हाथ माप के पलाश, देवदारु, शमी काष्ठ से घृत से अग्नि में होम करे॥२६-२८॥

नवाभिरोषधीभिश्च तिल-व्रीहि-यवैस्तथा।
शालीफलकश्यामाकैर्गोधूमैश्चैव होमयेत् ॥२९॥

नव औषधि, तिल, व्रीहि, जौ, शालीफलक, श्यामाक तथा गोधूम द्वारा होम करे॥२९॥

पौर्णमास्याममायां वा होमयेच्च विशेषतः।
चैत्र्यां तथाऽश्वयुज्यां च कुर्यादग्निं तथा क्रियाम् ॥३०॥

पूर्णिमा तथा अमावस्या को विशेष रूप से होम करे। विशेषतः चैत्र तथा अश्विन मास की पूर्णिमा एवं अमावस्या को होम करे॥३०॥

बहुहव्येन्धनैश्चाग्नौ सुसमिद्धे विशेषतः।
विधूमे लेलिहाने च होमये कर्मसिद्धये ॥३१॥

अनेक द्रव्य तथा काष्ठ से अग्नि प्रदीप्त हो, उससे धुआँ न उठे। लोहित वर्ण प्रज्वलित अग्निशिखा में कर्मसिद्धि के लिये होम करना चाहिये॥३१॥

अप्रबुद्धे सधूमे वा जुहुयान्न हुताशने।
यजमानो भवेद्न्यो ह्यपुत्र इति च श्रुतिः ॥३२॥

जब तक अग्नि सम्यक् रूप से प्रज्वलित न हो अथवा धूम्र से रहित न हो तब तक आहुति नहीं देनी चाहिये। ऐसा करने पर यजमान अन्धा तथा पुत्रहीन हो जाता है। यह श्रुतिवाक्य है॥३२॥

अर्चिष्मान् पीडितशिखस्तप्तकाञ्चनसन्निभः।
स्निग्धः प्रदक्षिणावर्त्तो वह्निः स्यात्कार्यसिद्धये ॥३३॥