भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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सप्तत्रिंशत्तमोऽध्यायः । १९१

नैवाकल्याणी युवतिर्नाल्पविद्यो न बालिशः।
होता स्यादग्निहोत्रस्य नार्त्तो नासंस्कृतस्तथा॥३४॥
नरकन्तु पतन्त्येते जुह्वतश्च धनक्षयः।
तस्माद्विज्ञानकुशलो होता स्याद्वेदपारगः॥३५॥

प्रदीप्त उज्ज्वल शिखायुक्त काञ्चन तुल्य स्निग्ध दक्षिणावर्त्त अग्नि से कार्यसिद्धि होती है। अग्निहोत्र का होता कभी भी अकल्याणी युवती, अल्पविद्य, मूर्ख, आर्त्त अथवा असंस्कृत न हो। होता व्यक्ति के पूर्वोक्त प्रकार की अग्नि से अतिरिक्त अग्नि में आहुति देने से नरकगामी हो जाता है। यजमान का धनक्षय होता है। अतः ज्ञानकुशल, वेदवित् होता होना चाहिये॥३३-३५॥

यत्फलं कर्मणस्तस्य ततो निगदितं शृणु।
अध्यक्षः सर्वकामोऽयं सोऽश्वमेधफलं लभेत्॥३६॥

इति श्रीसाम्बपुराणे अग्निविधानं नाम सप्तत्रिंशत्तमोऽध्यायः

यज्ञादि कर्म का जो फल है, उसे सुनो। समस्त कामना के अध्यक्ष (यज्ञकर्त्ता) अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करते हैं॥३६॥

श्री साम्बपुराणोक्त अग्निविधान नामक सैंतीसवाँ अध्याय समाप्त