साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१९४ श्रीसाम्बपुराणम्
देवगण भक्त द्वारा प्रदत्त सब कुछ स्वीकार कर लेते हैं; परन्तु नास्तिक द्वारा प्रदत्त वस्तु स्वीकार नहीं करते। नियम तथा आचारयुक्त भावशुद्धि प्रयोजनीय है। शुद्ध भावपूर्वक जो कुछ किया जाता है, वह स्तुति, जप, उपहार तथा पूजा सफल होती है।।१५-१६।।
उपवासेन षष्ठ्यां च सर्वपापैः प्रमुच्यते।
प्रणिधाय शिरो भूम्यां नमस्कारं करोति यः ॥१७॥
तत्क्षणात् सर्वपापेभ्यो मुच्यते नात्र संशयः।
सूर्यषष्ठी को उपवास करने से सभी पाप से मुक्ति मिलती है। जो भूमि पर मस्तक झुकाकर नमस्कार करते हैं, वे तत्क्षण सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं; इसमें सन्देह नहीं करना चाहिये।।१७।।
भक्तियुक्तो नरो यस्तु रवेः कुर्यात् प्रदक्षिणम् ॥१८॥
प्रदक्षिणीकृता तेन सप्तद्वीपा वसुन्धरा।
सूर्यं मनसि यः कृत्वा कुर्याद्वा च प्रदक्षिणम् ॥१९॥
प्रदक्षिणीकृतास्तेन सर्वे देवा भवन्ति हि।
जो भक्तिपूर्वक सूर्यप्रदक्षिणा करता है, मानों उसने सप्तद्वीपा पृथिवी की परिक्रमा कर ली है अथवा जो उनकी मन ही मन प्रदक्षिण करता है, उसने तो सभी देवों की प्रदक्षिण कर ली है।।१८-१९।।
एकहारपरो भूत्वा षष्ठ्यां योऽर्चयते रविम् ॥२०॥
नियमव्रतधारी च रवेर्भक्तसमन्वितः।
सप्तम्यां च महाप्राज्ञः सोऽश्वमेधफलं भवेत् ॥२१॥
अहोरात्रोपवासेन पूजयेद्यस्तु भास्करम्।
सप्तम्यामथ षष्ठ्यां च सूर्यलोकं स गच्छति ॥२२॥
जो षष्ठी के दिन मात्र १ बार आहार ग्रहण करके सूर्यार्चन करते हैं, साथ ही सप्तमी को भक्तियुक्त होकर नियम एवं व्रतपालन करते हैं, उन्हें अश्वमेध का फल प्राप्त होता है। जो सप्तमी अथवा षष्ठी को अहोरात्र उपवास करके सूर्योपासना करते हैं, वे मृत्यु के पश्चात् सूर्यलोक प्राप्त करते हैं।।२०-२२।।
शुक्लपक्षस्य सप्तम्यामुपवासपरो नरः।
सर्वरक्तोपहारेण पूजयेद्यस्तु भास्करम् ॥२३॥
सर्वपापविनिर्मुक्तः सूर्यलोकं स गच्छति।
जो शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि को उपवास द्वारा सूर्यपूजन करते हैं तथा रक्तवर्ण के समस्त उपहार से सूर्य की पूजा करते हैं, वे समस्त पापों से रहित होकर सूर्यलोक गमन करते हैं।।२३।।