भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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एकोनचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः २०९

मेखला यज्ञोपवीत—ॐ दुरुक्तदुरितपरिधानि स्वाहा।

काल्य आविक् त्वक् से बनाया गया दण्डकाष्ठ होगा। पलाश, गूलर तथा खदिर से बना दण्ड होगा। मेखला होगी दूब एवं मूँज से निर्मित तथा मौर्वी होगी बिल्व काष्ठ-निर्मित। अग्नि प्रज्वलित करके घृताहुति देकर पाकयज्ञपात्र द्वारा नीचे लिखे मन्त्र से सात आहुति से होम करे—

ॐ सरस्वत्यै स्वाहा, ॐ वेदवत्यै स्वाहा, ॐ चर्यावत्यै स्वाहा, ॐ सत्यवत्यै स्वाहा, ॐ ध्रुवावत्यै स्वाहा, ॐ स्वभावत्यै स्वाहा, ॐ प्रतिष्ठावत्यै स्वाहा।

इस प्रकार विधान करके गुरु अग्निकुण्ड से भस्म लेकर उसे शिष्य के मस्तक पर नीचे लिखे मन्त्र से पाँच बार लगाये—

पूर्वमध्य में—ॐ चित्राय स्वाहा।
पूर्व में—ॐ खमविष्णवे स्वाहा।
दक्षिण में—ॐ हिंसाय ठः ठः।
पश्चिम में—ॐ विदिताय ठः ठः।
उत्तर दिशा में—ॐ लिखने ठः ठः।

'ॐ सम्भूतिने' इत्यादि मन्त्र से समस्त शरीर में (सभी अंगों में) भस्म लगाये।

दीक्षाविधान के अनन्तर इन मन्त्रों से आहुति देनी चाहिये—ॐ सोमवत्यै स्वाहा, ॐ सुभगे ठः ठः, ॐ प्रेतवति ठः ठः, ॐ वाजिनवति ठः ठः (सबके अन्त में स्वाहा लगाये)। होम के अन्त में गृह के साथ समस्त उपकरण श्रीगुरुदेव को प्रदान करे तथा ऐसी ही प्रार्थना करे।।५८।।

श्रीसाम्बपुराणोक्त दीक्षाविधान नामक उनचालीसवाँ अध्याय समाप्त

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