भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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चत्वारिंशत्तमोऽध्यायः २११

चकारे पितरो नित्यं छकारे देवदानवाः।
जकारे च जगत् सर्वं झकारे बन्धनक्रिया ॥८८॥

'क' तथा 'ख' वर्ण को रवि का प्रसिद्ध रथ कहा गया है। 'ग' तथा 'घ' को उनका मण्डल कहते हैं। धीमान् देवदेव सूर्य का साक्षात् सारथी है—'ङ'। 'च'कार में नित्यपितृगण तथा 'छ'कार में देवता तथा दानवगण अवस्थान करते हैं। 'ज'कार में समस्त जगत् है तथा 'झ'कार में बन्धन क्रिया अवस्थित है॥७-८॥

अस्य पातनसम्भूर्तिर्जंकारः परिहासयेत्।
टकारस्त्रोटयेत्पाशाट्ठकारस्तिर्यगो भवेत् ॥८९॥
डकारोऽनुग्रहस्थानं ढकारः क्रोध उच्यते।
णकारा बालखिल्याद्या भृग्वाद्याश्च महातपाः ॥९०॥

इनके पातन तथा ऐश्वर्य को लेकर 'ञ'कार परिहास करता है। 'ट'कार पाप-बन्धन को छिन्न करता है और 'ठ'कार वक्रगामी है। 'ड'कार है—अनुग्रह-स्थान तथा 'ढ'कार को क्रोध कहते हैं। 'ण'कार हैं—बालखिल्य तथा भृगु-प्रभृति महातपा मुनिगण॥९-१०॥

तकारे सिद्ध-गन्धर्वास्थकारे पुण्यसम्भवः।
दमः प्रोक्तो दकारेण धकारो ब्रह्मगोचरः ॥९१॥
नकारे सर्वतोऽनन्तः पकारोऽक्षरसम्भवः।
फकारस्त्वशुभं हन्ति बकारेण शुभं स्मृतम् ॥९२॥

'त'कार में सिद्ध तथा गन्धर्वगण वास करते हैं। 'थ'कार पुण्यस्थान है। 'द'कार द्वारा दम को कहा गया है और 'ध'कार ब्रह्मप्रापक है। 'न'कार अनन्तस्वरूप है। 'प'कार अक्षर- उत्पत्ति का स्थान है। 'फ'कार अशुभ को नष्ट करता है एवं 'ब'कार को शुभदायक कहते हैं॥११-१२॥

भकारो भेदकः प्रोक्तो मकारः सरितांपतिः।
यकारो ग्रहनक्षत्रा रेफः प्रोक्तः प्रदाहकः ॥९३॥
लकारो विषयास्वादी वकारस्तु भवोद्भवः।
शकारः शोषयेद् दोषान् षकारो बीजमुच्यते ॥९४॥

'भ'कार को भेदक कहते हैं तथा 'म'कार को नदियों का पति 'सागर' कहा गया है। 'य'कार ग्रह-नक्षत्र है तथा 'र' को प्रदाहक कहते हैं। 'ल'कार विषय का आस्वादनकारी है। 'व'कार उत्पत्ति का कारणरूप है। 'श'कार सब दोषों का शोषण करता है और 'ष'कार बीजरूप कहा गया है॥१३-१४॥

सकारे छन्दसां जन्म हकारे ब्रह्मशाश्वतम्।
क्षत्रं परमनिर्वाणमभयं कामदं प्रभुम् ॥९५॥