साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः २१३
रुद्रमाग्नेयवायव्ये पद्म एतत् प्रकीर्तितम्।
चमत्कारकरं मन्त्रमुद्धतं साम्बकारणम्॥२३॥
'ॐ अं ॐ हूं जूं दुं दूं ओं ॐ'।
एतत्तु परमं गुह्यमेतत्तु परमं पदम्।
एतत्तु परमं ज्ञानमेतत्तु परमं पदम्॥२४॥
अग्नि तथा वायुकोण में रुद्र रहते हैं। इस प्रकार पद्म का वर्णन किया गया। साम्ब के लिये कहा गया चमत्कारी महामन्त्र है—'ॐ अं ॐ हूं जूं दुं दूं ओं ॐ'। यह परम गोपनीय, परम स्थान, परम ज्ञानस्वरूप तथा श्रेष्ठ ज्ञानप्रापक है॥२३-२४॥
व्यापकाभयसंयुक्तो यदा ह्यायुःप्रदो रविः।
रुद्रयुक्तो व्याधिहरो धनदो विष्णुयोजितः॥२५॥
जब सूर्य व्यापक तथा अभययुक्त रहते हैं तब वे आयुप्रद होते हैं। जब रुद्रयुक्त होते हैं, तब व्याधि हर लेते हैं। जब विष्णु से युक्त होते हैं, तब धन प्रदान करते हैं॥२५॥
सर्वान् संसाधयेदर्थान् योजितः परमेष्ठिना।
आकाशमध्यपातालमञ्जनं रोचनादिकम्॥२६॥
रुद्रेणात्यन्तसंरुद्धः शत्रूणां भयवर्द्धनः।
विष्णुना स्तम्भयेत्क्षिप्रं वाचं वाचस्पतेरपि॥२७॥
ब्रह्मा के साथ जब युक्त हो जाते हैं, तब लोगों का समस्त प्रयोजन सिद्ध हो जाता है। आकाश, अन्तरिक्ष, पाताल, तल, सब ज्ञान उनकी किरणों से युक्त हैं। रुद्र के साथ अत्यन्त युक्त होने पर वे शत्रुओं के लिये भयकारक हो जाते हैं। विष्णु से युक्त हो जाने पर बृहस्पति तक के वाक्य का स्तम्भन कर देते हैं॥२६-२७॥
नव वर्णाः शरीरस्य भास्करास्त्रं च दुर्धरम्।
षडङ्गं सम्प्रवक्ष्यामि तन्निबोध यथाक्रमम्॥२८॥
शरीर के नौ वर्ण भास्कर के दुर्धर अस्त्र-स्वरूप हैं। अब षडङ्ग कहता हूँ, उसे यथाक्रमेण सुनो॥२८॥
ॐ दूं हूं हृदयाय नमः। ॐ दूं क्षूं ॐ आं शिरसि। ॐ ऊं हूं आं क्षूं हूं डं ॐ शिखायाम्। ॐ ओं क्षूं ॐ कवचाय हुम्। ॐ हूं ॐ क्षूं नेत्रे।
ॐ क्षूं नेत्रं ब्रह्मरुद्रौ विष्णुरुद्रस्तथैव च।
हृदयं देवदेवस्य भास्करस्य जगत्पतेः॥२९॥
षडङ्ग मन्त्र इस प्रकार है। हृदय—ॐ दूं हूं हृदयाय नमः। मस्तक—ॐ दूं क्षूं ॐ आं शिरसि। शिखा—ॐ ऊं हूं आं क्षूं हूं डं ॐ शिखायां। कवच—ॐ ओं क्षूं ॐ