साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 225, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ेंचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः २१५
युक्त करके अग्नि में होम करना चाहिये। सन्ध्या के समय भास्कर अस्त्र के द्वारा होम करना चाहिये।।३६-३७।।
होमावसाने च पुनर्होमभागो विधीयते।
ततः कृतार्थतामेति साधको देवदर्शनात् ॥३८॥
होम के अन्त में होम का भाग करे। तदनन्तर साधक देवदर्शन के फल से कृतार्थता प्राप्त करता है।।३८।।
त्रिकालवेदी तत्त्वज्ञो गुणत्रय-विवर्जितः।
प्राप्नुयात् परं स्थानमनिलानलवर्जितम् ॥३९॥
जो प्रकाश के ज्ञाता (भूत-भविष्य तथा वर्तमान को जानने वाले), तत्त्वज्ञ एवं गुणत्रय-वर्जित हैं, वे अग्नि तथा वायुरहित परम स्थान को प्राप्त करते हैं।।३९।।
स एवं पूज्यते मन्त्री देववद् भुवि मानवैः।
त्राता स एव लोकानां व्याधिदुःखविनाशनः ॥४०॥
अप्रमेयमिदं शास्त्रं पुराणं पूर्वचोदितम्।
द्वापरे नारदेनैव पुनः साम्बाय भाषितम् ॥४१॥
ततः प्रभृति लोकेषु प्रवृत्तं भास्करध्वजम्।
सर्वपापहरं पुण्यं सर्वकाम-प्रदायकम् ॥४२॥
इति श्रीसाम्बपुराणे यज्ञस्थानविधिनिरूपणं नाम चत्वारिंशत्तमोऽध्यायः
वह मन्त्रसाधक पृथ्वी पर जनगण द्वारा देवता के समान पूजित होता है। वह समस्त लोक का त्राणकर्त्ता एवं व्याधि तथा दुःख का विनाशक हो जाता है। तुलनारहित यह पुराण पूर्व में भी प्रकट था, जिसे द्वापर में नारद ने पुनः साम्ब को सुनाया। तभी से संसार में भास्कर ध्वजा प्रवृत्त होती है, जो समस्त पापहारी है। साथ ही परम पवित्र एवं समस्त कामनाओं को देने वाला है।।४०-४२।।
श्री साम्बपुराणोक्त यज्ञस्थानविधि नामक चालीसवाँ अध्याय समाप्त