भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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२२० श्रीसाम्बपुराणम्

हे देव! आप आईये-आईये। आप शब्दमूर्त्ति को आवृत्त करके स्थित हैं। सबके द्वारा वरणीय होकर इस यज्ञ को देखिये। देवता, असुर तथा धर्मादि चतुर्वर्ग जिसका पालन करते हैं, उन सबके आप ही पूजनीय हैं॥४॥

ज्ञानं मन्त्रार्चितो भूयः कुसुमैश्च विधानतः।
गच्छ देव यथाकामं पुनरागमनाय च॥५॥

ज्ञानमन्त्रों द्वारा आप अर्चित हैं और यथाविधि पुष्पों से पूजित हैं। हे देव! आप पुनः आने के लिये यथेच्छा से गमन करिये॥५॥

इदमेव परं सत्यमिदमेव परं तपः।
इदमेव परो देवः सुरासुरनमस्कृतः॥६॥

यही परम सत्य है, परम तपस्या है। ये ही देवता तथा असुरों द्वारा नमस्कृत परम देव हैं॥६॥

पुराणोक्तमिदं शास्त्रं यः पठेत् प्रयतः शुचिः।
स सहस्रार्चिषं देवं प्रविशेन्नात्र संशयः॥७॥

पुराणोक्त इस शास्त्र का साग्रह पवित्र मन से जो पाठ करते हैं, वे सूर्यलोक में गमन करते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है॥७॥

तीर्थानां परमं तीर्थं मङ्गलानां च मङ्गलम्।
पवित्राणां पवित्रं च श्रोतव्यं परमं पदम्॥८॥
इति श्रीसाम्बपुराणे दीक्षाविधानो नाम एकचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः

तीर्थों में यह परम तीर्थ है। मंगलों में परम मंगल है। पवित्रों में परम पवित्र है तथा यह परम वस्तु श्रोतव्य है॥८॥

श्री साम्बपुराणोक्त दीक्षाविधान नामक इकतालीसवाँ अध्याय समाप्त