साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 243, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्रिचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः २३३
एवं युक्तिं समाधाय सर्वधर्मपरायणाः।
कीर्त्तयित्वा रवेः कीर्त्तिर्जग्मुः सूर्यालयं प्रति॥५६॥
प्रजापतीनामिदमालयं रवेर्विधायितं देववरानुकम्पितम्।
विघातकास्तत्र पतन्त्यसाधवो वह्नेः शिखायां शलभा इव क्षणात्॥५७॥
इति श्रीसाम्बपुराणे सूर्यस्तुतिर्भक्तमाहात्म्यं नाम त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः
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ऐसा स्थिर निश्चय करके सभी धर्मपरायण लोग सूर्य की कीर्त्ति-कथा का गान करते हुये सूर्यालय में गये। प्रजापतियों द्वारा निर्धारित सूर्य का यह मन्दिर देवश्रेष्ठ सूर्यदेव से अनुकम्पित है। इसके विघ्नकारी असाधुगण अग्निशिखा में पड़ते जा रहे पतङ्गों के समान तत्क्षण नष्ट हो जाते हैं॥५६-५७॥
श्री साम्बपुराणोक्त सूर्यस्तुति तथा भक्तमाहात्म्यनामक तैंतालीसवाँ अध्याय समाप्त
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