भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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पृष्ठ 259

पञ्चचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः २४९

ततः सूर्यो ददौ तस्मै छत्रोपानहमाशु वै ॥३४॥
उवाच स मुनिश्रेष्ठमिदं वचनमुत्तमम्।
महर्षे शिरसस्त्राणं छत्रं मद्रश्मिवारणम् ॥३५॥
प्रतिगृह्णीहि पद्भ्यान्तु धारणार्थं च पादुके।
अद्य प्रभृति चैवाऽस्मिंल्लोके सम्प्रचरिष्यति ॥३६॥

हे सुरोत्तम! इस ताप के चले जाने पर आप समाधि में चिन्तन करें, जिससे सुख से गमन हो सके तथा वह अक्षय हो। ब्राह्मण को छत्रदान करने से (व्यक्ति) परलोक में सुखी होता है। आपके प्रति मेरा कोई क्रोध नहीं है। मेरी दृष्टि के सम्मुख प्रकट होकर भी आप समस्त लोक का हित करने वाले हैं। तदनन्तर जमदग्नि को सूर्यदेव ने शीघ्रता से छाता तथा पादुका प्रदान किया और उन्होंने (सूर्यदेव ने) मुनिश्रेष्ठ से कहा—महर्षि! मेरे ताप से छुटकारा पाने के लिये मस्तक का रक्षण करने वाला यह छत्र (छाता) तथा दोनों पैरों में धारण करने हेतु यह पादुकायुगल धारण कीजिये। आज से यह जगत् में प्रचारित होगा।।३२-३६।।

पुण्यकेष्वपि सर्गेषु परमक्षय्यमेव च।
छत्रं द्विजाय यो दद्यात् स प्रेत्य सुखमेधते ॥३७॥
शक्रलोके च वसति ह्यप्सरोभिः समावृतः ॥३८॥
उपानहौ च यो दद्यात् श्लक्ष्णे स्नेहसमन्विते।
गोलोके स मुदायुक्तो वसति प्रेत्य मानवः ॥३९॥

पुण्य कार्य में यह परम अक्षय (पुण्य कार्य) है। जो ब्राह्मण को छत्रदान करेगा, उसे परलोक में सुख-वृद्धि होगी तथा इन्द्रलोक में अप्सराओं से परिवृत होकर वह निवास करेगा। सुन्दर नरम पादुका जो दान करेगा, वह परलोक में अर्थात् गोलोक में सानन्द निवास करेगा।।३७-३९।।

एवमुक्त्वा तु भगवान् भास्करो लोकपावनः।
शान्तयित्वा द्विजश्रेष्ठं तत्रैवान्तरधीयत ॥४०॥
मयापि ते यदुश्रेष्ठ कथितं पुण्यवर्धनम्।
छत्रपादुकयोर्दानं यथा सूर्येण भाषितम् ॥४१॥

इति श्रीसाम्बपुराणे छत्रपादुकादानफलवर्णनं नाम पञ्चचत्वारिंशत्तमोऽध्यायः

यह कहकर भगवान लोकपावन भास्कर ब्राह्मण जगदग्नि को सान्त्वना देकर वहीं अन्तर्धान हो गये। हे यदुश्रेष्ठ! इस प्रकार सूर्य ने जैसा कहा था, मैंने भी तुमसे उस पुण्यवर्धक छत्र तथा पादुकादान का वर्णन किया।।४०-४१।।

श्री साम्बपुराणान्तर्गत छत्र-पादुकादानफल नामक पैंतालीसवाँ अध्याय समाप्त