साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 260, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ेंषट्चत्वारिंशत्तमोऽध्यायः
(सप्तमीकल्पः)
साम्ब उवाच
भगवन् श्रोतुमिच्छामि सप्तम्यास्तु विधिक्रमम्।
सर्वास्तामानुपूर्व्येण कथयस्व महामुने॥१॥
साम्ब कहते हैं—भगवन्! सप्तमी सूर्यपूजन की विधि सुनने की इच्छा हो रही है। हे महामुनि! उसका आनुपूर्वीक वर्णन करिये॥१॥
नारद उवाच
शृणु साम्ब महाबाहो सप्तमीनां विधिं परम्।
तमहं कीर्तयिष्यामि भक्त्या यत् परिपृच्छ्यते॥२॥
तुभ्यं यदुकुलश्रेष्ठ यथा ख्यातं विवस्वता।
शुक्लपक्षे रविदिने प्रवृत्ते चोत्तरायणे॥३॥
पुन्नामधेयनक्षत्रे गृह्णीयात् सप्तमीव्रतम्।
ऋषिभिर्ज्ञानसम्पन्नैः सर्वकामफलप्रदा॥४॥
सप्तम्यः सप्त कथितास्तासां नामानि मे शृणु।
अर्कसम्पुटकैरेका द्वितीया मरिचैस्तथा॥५॥
तृतीया निम्बपत्रैस्तु चतुर्थी फलसप्तमी।
पञ्चम्यनादिनी स्यात्तु षष्ठी विजयसप्तमी।
सप्तमी कामिका नाम विधिमासां निबोध मे॥६॥
देवर्षि नारद कहते हैं—हे महाबाहु साम्ब! सप्तमी तिथि की श्रेष्ठ विधि को सुनो। तुमने भक्तिपूर्वक जो पूछा है, उसका वर्णन तुमसे करता हूँ। हे यदुकुलश्रेष्ठ! सूर्यदेव ने जैसा कहा था, वह तुमसे मैं कहता हूँ। उत्तरायण होने पर शुक्ल पक्ष के रविवार की पुष्य नक्षत्र वाली सप्तमी को ग्रहण करो (अर्थात् उस दिन पूजन करो)।
ज्ञानयुक्त ऋषिगण ने सात प्रकार की सप्तमी की बात कही है। उसका नाम मुझसे सुनो। अर्कसम्पुट द्वारा प्रथम, मरिच द्वारा द्वितीय, नीम के पत्ते द्वारा तृतीय, चतुर्थ है—फलसप्तमी (फल द्वारा), पञ्चम है—अनादिनी सप्तमी। षष्ठ है—विजयसप्तमी तथा सप्तम है—कामिका सप्तमी। अब इनका विधान मुझसे श्रवण करो॥२-६॥