भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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पृष्ठ 262

२५२ श्रीसाम्बपुराणम्

विधानकुशल व्यक्ति ऐसा करके कामिका सप्तमी व्रत करे। इन सप्तमियों का नाम पृथक्-पृथक् पत्ते पर लिखकर एक नये घट में छोड़े। इसका अर्थ जो नहीं जानता, वह बालक अथवा अन्य नर है। उसमें से एक-एक को निकाले। इसमें कोई विचार नहीं करना चाहिये। विचक्षण व्यक्ति इस प्रकार के विधान से प्रत्येक पक्ष में अनुष्ठान करे।।१३-१५।।

सप्तैव यावत् संप्राप्ता विज्ञेया सा तु कामिका।
इत्येता सप्त सप्तम्यः स्वयं प्रोक्ता विवस्वता ॥१६॥

जब सातो प्राप्त हो जाती हैं, तब उसे ही कामिका सप्तमी कहते हैं। इन सातों का वर्णन स्वयं सूर्यदेव ने किया है।।१६।।

कुर्वीत यो नरः साम्ब सर्वपापैः प्रमुच्यते।
अर्कसम्पुटकैर्वित्तं मरिचैः प्रियसङ्गमम् ॥१७॥

हे साम्ब! जो व्यक्ति इन सातो सप्तमी के व्रत का अनुष्ठान करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है। अर्कसम्पुट सप्तमी व्रत से वित्तलाभ होता है तथा मरिच सप्तमी व्रत के अनुष्ठान से प्रियजनों का मिलन होता है।।१७।।

निम्बपत्रे रोगानाशं फलैः पुत्रान्यथेप्सितम्।
धनधान्यमनादिन्यां विजये विजयं तथा ॥१८॥

निम्ब सप्तमी में नीम के पत्तों से रोग का नाश होता है। फल वाली सप्तमी में अभीष्ट पुत्र की प्राप्ति होती है। अनादिनी सप्तमी व्रत द्वारा धन-धान्य का लाभ होता है। विजया सप्तमी व्रत विजय दिलाती है।।१८।।

सर्वान् कामान् कामिकायां प्राप्नुयान्नात्र संशयः।
नरो वा यदि वा नारी यः कुर्यात् सप्तमीव्रतम् ॥१९॥

नर अथवा नारी में से जो कोई भी सप्तमी व्रत करे, उन्हें कामिका सप्तमी व्रत से समस्त कामनाओं की पूर्ति का लाभ मिलता है। यह निःसंदिग्ध है।।१९।।

ये करिष्यन्ति नितरां तेषां लोको विभावसोः।
न तेषां त्रिषु लोकेषु किञ्चिदस्तीह दुर्लभम् ॥२०॥

जो निरन्तर सप्तमी व्रत करते हैं, उन्हें सूर्यलोक प्राप्त होता है। उनके लिये त्रिलोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं रह जाता।।२०।।

ये भक्ता लोकनाथस्य व्रतिनः संयतेन्द्रियाः।
तत्फलं ते प्राप्नुवन्ति क्रतुभिर्भूरिदक्षिणैः ॥२१॥