भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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२६४ | श्रीसाम्बपुराणम्

फेनबुद्बुदयुक्तेन नीरेण शुचिना सदा।
अङ्गुष्ठेनैव वामेन ऐन्द्रया सौम्यां व्यवस्थितः॥८॥

इति श्रीसाम्बपुराणे शौचादिविधानो नामैकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः


पुनः सूर्य-धर्म तथा हृदय का तीन बार आचमन करके जलपान करे। मस्तक से लेकर मुख-पर्यन्त मार्जना करके शिखा के अग्रभाग तथा आकाश का स्पर्श करे। फेनयुक्त जल द्वारा सर्वदा पवित्र रहे। वाम अंगुष्ठ द्वारा ऐन्द्री (पूर्व) तथा सौम्य (उत्तर) दिशा में अवस्थान करे (?)॥७-८॥

श्री साम्बपुराणान्तर्गत शौचादि-विधान नामक उनचासवाँ अध्याय समाप्त

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