भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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२६८ श्रीसाम्बपुराणम्

तदनन्तर अर्कहृदय का दान करके इस मन्त्र से विसर्जन किया जाता है—गच्छ गच्छ स्ववर्गेन द्वादशादित्यविग्रहः ॐ हिलि हिलि गच्छ देव यथागतं स्वाहा।
विहार मन्त्र—ॐ चण्डपिङ्गलाय स्वाहा।
इस प्रकार पदपिण्ड विधान से यह श्रेष्ठ पूजा कही गयी है। इससे भुक्ति-मुक्ति दोनों प्राप्त होती है। यह पूजा सर्वदा आरोग्य तथा बलदायिका है।
अब द्वितीय पिण्डपूजा विधान कहते हैं। पदपिण्ड द्वारा पूजाविधि कही गया है। अब संक्षेप में परदेवता का वर्णन करता हूँ, सुनो।
ॐ विश्वात्मने नमः, ॐ रथाङ्गेभ्यो नमः—इन मन्त्रों से विश्वात्मा तथा रथाङ्ग की पूजा करनी चाहिये। मूलमन्त्र है—ॐ खं खखोल्काय नमः।
तदनन्तर हृदयादि न्यास करे—ॐ अर्काय स्वाहा—हृदयम्। ॐ दीप्ताय स्वाहा—शिरः। ॐ चिपिटये स्वाहा—शीर्षम्। ॐ जगच्चक्षुषे नेत्रम्। ॐ प्रभाकराय हूं स्वाहा—कवचम्। ॐ महातेजसे हूं फट्—अस्त्रम्।
अब इन मन्त्रों से उन-उन देवताओं की पूजा करे, जो मन्त्र में अंकित हैं—ॐ देवाङ्गेभ्यो नमः, ॐ महाश्वेतादिभ्यो नमः, ॐ अरुणादिभ्यो हूं नमः। ॐ हरिकेशादिभ्यो नमः, ॐ पुञ्जिकास्थल्यादिभ्यो नमः, ॐ गणाधिपतये नमः, ॐ छायादिभ्यो नमः, ॐ ग्रहेभ्यो हूं नमः, ॐ दिग्देवताभ्यो नमः।
हृदय से आवाहनादि सब करना कर्त्तव्य है। देवगणों के मन्त्र द्वारा ही पूजा-कर्म का विधान है।

श्रीसाम्बपुराणोक्त पूजाविधान-नामक पचासवाँ अध्याय समाप्त