भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

पृष्ठ 279, कुल 424 में से

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पृष्ठ 279

एकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

(ग्रहादिदेवानां पूजनम्)

ॐ चन्द्राय हुं नमः। ॐ मंगलाय हुं नमः। ॐ बुधाय हुं नमः। ॐ बृहस्पतये हुं नमः। ॐ शुक्राय हुं नमः। ॐ शनैश्चराय हुं नमः—एते ग्रहाणां मन्त्राः। ॐ इन्द्राय सुराधिपतये नमः। ॐ अग्नये तेजोधिपतये नमः। ॐ यमाय प्रेताधिपतये नमः। ॐ निर्ऋतये रक्षोधsingleधिपतये नमः। ॐ वरुणाय जलाधिपतये नमः। ॐ वायवे प्राणाधिपतये नमः। ॐ कुबेराय यक्षाधिपतये नमः। ॐ शङ्कराय सर्वात्मने नमः। ॐ विद्याधिपतये नमः। ॐ ब्रह्मणे सर्वलोकाधिपतये नमः। ॐ शेषाय सर्वनागाधिपतये नमः—एते दिग्देवानां मन्त्राः।

ग्रहदेवताओं का पूजन इस प्रकार करना चाहिये—ॐ चन्द्राय हुं नमः, ॐ मङ्गलाय हुं नमः, ॐ बुधाय हुं नमः, ॐ बृहस्पतये हुं नमः, ॐ शुक्राय हुं नमः, ॐ शनैश्चराय हुं नमः। तदनन्तर मूल में अंकित मन्त्र से सुराधिपति इन्द्र, तेज के पति अग्नि, प्रेताधिपति यम, राक्षसाधिपति निर्ऋति, जलाधिपति वरुण, प्राण के अधिपति वायु, यक्षों के अधिपति कुबेर, सर्वात्मस्वरूप शंकर, विद्याधिपति, सर्वलोकाधिपति ब्रह्मा तथा समस्त नागों के अधिपति शेष का पूजन करे।

अतः परं प्रवक्ष्यामि स्नानस्य विधिमुत्तमम्।
निर्मले सलिले स्नायात् सुतीर्थे हृदयादिभिः ॥१॥
मनसा तत्तदङ्गेषु दत्त्वैव शिरसा तथा।
ध्यात्वा पुण्यानि तीर्थानि वगाहेच्छिरसा जलम् ॥२॥

अब स्नान की उत्तम विधि कहूँगा। सुतीर्थ में, सहृदय निर्मल जल में स्नान करे। मन ही मन सभी अंगों में तथा मस्तक में मृत्तिका लगाकर पुण्य तीर्थों का स्मरण करके डुबकी लगाकर स्नान करे॥१-२॥

धर्मास्त्रनेत्रैः कुर्वीत ब्राह्मणान् मन्त्रयेत्ततः।
पूरकाभ्यां खखोल्केन अर्कमीक्षेत सप्तधा ॥३॥
विन्यसेन्मन्त्रसंयोगं त्वचाङ्गुष्ठादितः क्रमात्।
ततः स्वहस्ततलयोर्वरुणादींश्च संख्यया ॥४॥
अमृताख्यां ततो बद्ध्वा मुद्रा ध्यानं समाचरेत्।
जाठरं ज्वालयेदग्निं पुरकाकुलवायुना ॥५॥