भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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पृष्ठ 287

एकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः २७७

‘खखनेत्रसहस्राय नमः’ मन्त्र से वस्त्र प्रदान करे तथा ‘पिङ्गला छन्दला’ मन्त्र से गन्ध-दान करे।।६२।।

प्रणवादिहिलीतिद्विर्महामालाधरस्तथा ।
तेजोऽधिपतिर्नमोन्तऽश्च पुष्पमन्त्र उदाहृतः ॥६३॥
ज्वलितार्कस्तु तारादिर्धूपद्भिर्मिहिरज्वलः ।
विचित्ररत्नधारीति नमोऽन्तो भूषणः स्मृतः ॥६४॥

‘ॐ हिलि हिलि महामालाधारतेजोऽधिपतये नमः’ यह पुष्पदान का मन्त्र है। ‘ॐ ज्वलितार्क धूप धूप मिहिर ज्वल विचित्ररत्नधारिन् नमः’ इस मन्त्र से भूषणादि प्रदान किया जाता है।।६३-६४।।

महाश्वेता दण्डपाणिररुणिः पिङ्गलस्तथा।
प्रणवादिनमोऽन्ताश्च संयोज्याः पद सन्त्वि मे ॥६५॥

‘ॐ महाश्वेता दण्डपाणि अरुणि पिङ्गलाय नमः’।

अरुणः सूर्योऽशुमाली धातेन्द्रश्च रविस्तथा।
गभस्तिश्च यमश्चैव स्वर्णरितास्तथैव च ॥६६॥
त्वष्टामित्रोऽथ विष्णुश्च द्वादशैव प्रकीर्तिताः ।
आदित्याः प्रतपन्त्येते माघमासादिषु क्रमात् ॥६७॥

अरुण, सूर्य, अंशुमाली, धाता, इन्द्र, रवि, गभस्ति, यम, स्वर्णरिता, त्वष्टा, मित्र तथा विष्णु—इन बारह नामों से सूर्य क्रमशः माघ आदि बारह मास में ताप देते हैं। माघ में अरुण, फाल्गुन में सूर्य, चैत्र में अंशुमाली, वैशाख में धाता, ज्येष्ठ में इन्द्र, आषाढ़ में रवि, श्रावण में गभस्ति, भाद्रपद में यम, आश्विन में स्वर्णरिता, कार्तिक में त्वष्टा, अग्रहायण में मित्र एवं पौष मास में विष्णु ताप देते हैं।।६६-६७।।

प्रणवादिस्मायुक्तानेतानेवं च संज्ञया ।
सहुंकारनमस्कारान् संयुक्तान् संप्रयोजयेत् ॥६८॥

इन नामों के आदि में प्रणव तथा अन्त में हुं नमः लगाये अर्थात् ॐ अरुणाय हुं नमः, ॐ सूर्याय हुं नमः इत्यादि।।६८।।

हरिकेशो रथः कृच्छ्रो रथौजाः पुञ्जिकस्थलः।
क्रतुस्थलो विश्वकर्मा तथा चैव रथस्वनः ॥६९॥
रथचित्रोऽथ मेनाख्यः सहजन्यस्तथाप्सराः।
विश्वव्यचा रथप्रोतः सहासमाठरेण तु ॥७०॥
प्रम्लोचन्त्यनुम्लोचन्ती संयद्वसुरथापरः।
तार्क्ष्यश्चारिष्टनेमिश्च विश्वाची च घृताचिका ॥७१॥

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