साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंएकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः २८९
पञ्चानां तु सुखादीनां कारणं हि यतः स्मृतः।
खखोल्क इति तेनासौ निगमज्ञैरुदाहृतः ॥१३८॥
तदनन्तर बहुत समय पश्चात् हिरण्मय अण्ड का निर्माण करके वहाँ अनेक शक्ति-समन्वित होकर उन्होंने अपनी सृष्टि किया। वे खखोल्क नाम से प्रसिद्ध थे। वे एक प्रकाशकस्वरूप थे। ‘विराट्’ संज्ञा से अपर पुरुष के रूप में वे ही ख्यात हुये। ये अपर पुरुष ही ब्रह्मा नाम से प्रसिद्ध हैं; क्योंकि ये पञ्च सुखों के हेतु हैं। इसीलिये वेदज्ञ विद्वान् इनको खखोल्क कहते हैं॥१३६-१३८॥
हिरण्येन च गर्भस्थो यस्मादेष समावृतः।
हिरण्यगर्भ इत्येवं तस्मात् स तु निगद्यते ॥१३९॥
बृहत्वाद्वृंहणत्वाद्वा ब्रह्माऽसौ परिकीर्तितः।
पुरे प्रतिष्ठितत्वाच्च पुरुषत्वमुपागतः ॥१४०॥
यह गर्भस्थ स्थिति में स्वर्ण (हिरण्य) द्वारा घिरे हुये थे, अतएव इनको हिरण्यगर्भ कहा जाता है। बृहत्तम तथा सर्वव्यापक होने के कारण इनको ब्रह्मा कहते हैं। पुर (देह) में प्रतिष्ठित होने के कारण ही इनकी प्रसिद्धि ‘पुरुष’ नाम से हुई॥१३९-१४०॥
देवेषु च महादेवो महादेवस्ततः स्मृतः।
सदेशत्वाच्च लोकानामवश्यत्वान्महेश्वरः ॥१४१॥
याति यस्मात्प्रजाः सर्वा प्रजापतिरिति स्मृतः।
स्वयं बभूव पूर्णत्वात्स्वयम्भूरिति विश्रुतः ॥१४२॥
सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रभुक्।
सहस्रबाहुः प्रथमः पुरुषोऽसौ निगद्यते ॥१४३॥
देवों में इनको महान् कहा जाता है, अतः ये महादेव हैं। सभी लोकों के शासनकर्त्ता तथा अन्य के वश में न आने वाले होने के कारण इनको महेश्वर कहते हैं। समस्त प्राणीगण इनसे ही उत्पन्न हैं, अतएव ये प्रजापति कहलाते हैं। परिपूर्ण तथा स्वयंजात होने के कारण इनको स्वयम्भू कहा जाता है। सहस्र मस्तक-विशिष्ट पुरुष, जिनके हजारो पैर हैं, जो सहस्र भोक्ता, सहस्र बाहुयुक्त हैं; इसीलिये इनको पुरुष भी कहा गया है (यहाँ सहस्र शब्द असंख्यवाचक है)॥१४१-१४३॥
यत्किञ्चिद्दृश्यते लोके तेजोरूपं प्रकाशकम्।
खखोल्क इति तत्सर्वं निर्दिष्टं लोककारणम् ॥१४४॥
सर्वोपाधिविनिर्मुक्तं नित्यं सदसदात्मकम्।
विज्ञानमात्रमव्यक्तं तमाहुः कारणं परम् ॥१४५॥
साम्ब०—१९