साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 327, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ेंपञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः ३१३
चारुरूपां समाधानां हेमस्रग्वस्त्रभूषिताम्।
सितवस्त्रावृतखुरां द्वारेणाप्यानयेत्सदा ॥७९॥
जिनके उद्देश्य से इसे अंकित किया गया है, उन्हें पूर्व में निवेश कराये (उन शिष्यों को पूर्व में स्थित करे)। सर मौन पगड़ी पहने, मौन, उज्ज्वल हस्त, श्वेत वस्त्रधारी शिष्य को पापनाशक गौ के पुच्छ के जल द्वारा खखोल्क मन्त्र से गुरु अभिषिञ्चन कराये। शिष्य गुरु को बछड़े के साथ गौदान करे। गौ सुन्दर हो। स्वर्ण, माला तथा वस्त्र से भूषित हो, श्वेत वस्त्र द्वारा आवृत, विशिष्ट खुरों वाली गौ को द्वार पर लाये॥७६-७९॥
प्रवेश्य यष्ट्याः पुरतः स्थापयेत्सुसमाहितः।
कायिकं वाचिकं चैव मानसं च हरेद् गुरुः ॥८०॥
पापं हि त्रिविधं तस्य खखोल्कहृदयादिभिः।
पुष्पैरञ्जलिमापूर्य जानुभ्यां धरणीं गतः ॥८१॥
खखोल्कमिति-मन्त्रेण कमले प्रक्षिपेत्तदा।
पद्मस्य यस्मिन्देवाग्रे प्रक्षिप्तं कुसुमं पतेत् ॥८२॥
प्रवेश करके याग करे। सामने सुसमाहित शिष्य को स्थापित करे। गुरु शिष्य के कायिक-वाचिक तथा मानसिक त्रिविध पाप का हरण खखोल्क हृदयादि से करे। पुष्प के द्वारा अञ्जलि पूर्ण करे। जानुद्वय को भूमि पर टिकाकर 'खखोल्क' इत्यादि मन्त्र से कमल निक्षेप करे। ऐसे निक्षिप्त करे कि देवता के आगे पुष्प गिरें॥८०-८२॥
एतस्य कुलदेवः स्यात्सद्यः सर्वार्थसाधकः।
उत्पाद्य मुखबन्धन्तु दृष्ट्वा हंसं समन्ततः ॥८३॥
खखोल्ककुलदेवस्य प्रणमेद्यत्नतः क्रमात्।
पद्मरागेण हेम्ना वा युक्तं सर्वान्निवेशयेत् ॥८४॥
वे होंगे शिष्य के कुलदेवता तथा सद्यः सर्वार्थ-साधक। मुखबन्ध करके चारो ओर हंस (जीवात्मा) को देखे। यत्नपूर्वक खखोल्क कुलदेवता को प्रणाम करे। पद्मरागमणि से अथवा स्वर्ण से सबकी स्थापना करे॥८३-८४॥
ऐशानीं तु दिशं नीत्वा गुरुः शिष्यं कुशासने।
उपवेश्य ततो दद्यान्नृपतिर्यजनानि तु ॥८५॥
गुरुदेव शिष्य को ईशानी (पूर्व तथा उत्तर के मध्यवर्त्ती के अधिपति) शिव की ओर ले जाकर कुशासन पर बैठाये। नृपति वहाँ बैठकर पूजोपहार प्रदान करें॥८५॥
कुशाग्रेण समादाय कलशेभ्यो गुरुर्जलम्।
पूर्वाननं खखोल्काग्रैः शिष्यं तमभिषेचयेत् ॥८६॥