साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३२० श्रीसाम्बपुराणम्
सप्तशृङ्ग-कृत वह सात कलात्मक है। यह तत्त्व ज्ञान का बीज है। इसके अनन्तर (परे) कोई बीज नहीं है। प्रथम जो १५ है, वह संज्ञारूप है। बिन्दु के साथ प्लुत (दीर्घ) स्वर जानना चाहिये तथा यथाक्रम से विसर्ग जानना चाहिये। प्रथम केसर में अ से ॐ पर्यन्त अवस्थित है। द्वितीय में 'क' से 'ह' पर्यन्त स्थित है।।८-१०।।
अकारादिक्षकारान्ताः पञ्चाशद्यंत्रसंख्यया।
एतद्धृदयपद्मं स्याद्बीजयोनिकृतं प्रभो ॥११॥
ध्यात्वैतन्मुच्यते सर्वो बीजनिर्दग्धकल्मषः।
विधिना दीक्षितश्चास्मिन्मण्डले बीजयोनिजे ॥१२॥
निष्कलं सकलं चैव तथा सकलनिष्कल।
ध्यानं ज्ञेयं च योगश्च सर्वमेतस्य कीर्तितम् ॥१३॥
इति श्रीसाम्बपुराणे ज्ञानोत्तरे षट्पञ्चाशत्तमेऽध्याये तृतीयं पटलम्
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'अ' से 'क्ष' पर्यन्त ५० यन्त्र संख्या है। हे प्रभु! बीजयोनिकृत यही है—हृदयपद्म। बीजयोनि से उत्पन्न इस मण्डल में यथाविधि दीक्षित सब व्यक्ति बीज के द्वारा पापयुक्त होते हैं तथा ध्यान के फल से मुक्त हो जाते हैं। निष्कल-सकल एवं सकल-निष्कल ध्यान तथा योग को जानना चाहिये।।११-१३।।
श्री साम्बपुराणोक्त ज्ञानोत्तर छप्पनवें अध्याय में तृतीय पटल समाप्त
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