साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 339, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ेंएकोनषष्टितमोऽध्यायः
(ज्ञानोत्तरे बीजस्वरप्रसवः)
पञ्चविंशतिभिर्नाम सप्तधा क्रमशस्तथा।
प्रणवादिस्त्रिधा भिन्नं तस्मिन्नेव पदे उभे ॥१॥
प्रणवादिर्नमोऽन्तस्थः प्रसवः सप्तमस्तु सः।
एषामादिपदं यत्स्याद् द्वितीयां चैव योजयेत् ॥२॥
तथा चादिपदैस्तत्त्वं प्रतिलोमो विधीयते।
योनि मुख्यानि यानि स्युः सर्वसृष्टिप्रवृत्तये ॥३॥
इति श्रीसाम्बपुराणे एकोनषष्टितमोऽध्यायः ज्ञानोत्तरे बीजस्वरप्रसवे षष्ठं पटलं समाप्तम्
२५ द्वारा क्रम-क्रम से सात प्रकार के नाम हैं। आदि में प्रणव है। तीन प्रकार से भिन्न रूप उसका उदय पद है। आदि में प्रणव, अन्त में नमः शब्द सप्तम उत्पत्ति है। उसका स्तव करता है। इसमें जो आदि पद है, उसमें द्वितीय का योग करे। इस प्रकार आदि पद द्वारा प्रतिलोम में तत्त्व की उत्पत्ति होती है। समस्त सृष्टि में प्रवृत्ति के कारण ये योनिमुख हैं॥१-३॥
श्री साम्ब पुराणोक्त उनसठवें अध्याय में ज्ञानोत्तर बीजस्वर प्रसव अध्याय का षष्ठ पटल समाप्त