साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंएकषष्टितमोऽध्यायः ३३९
सभी प्राणियों में व्रत आचरण में अशक्त व्यक्तियों को विघ्न परिलक्षित होता है—सृष्टि का विनाश, नक्षत्रादि का पतन। भूतयोनि व्रत करे। इन सबमें से किसी एक व्रत के आचरण द्वारा इसे करे। एक मास में व्रत द्वारा सिद्ध हो जाने पर सब (कामनायें) इससे सिद्ध हो जाती हैं। इस व्रत द्वारा दिव्य-भौम तथा निज देहजात रोगों का विनाश करे। मन्त्रज्ञ साधक शान्ति कर्मों में इन्हीं व्रत का पालन करे।।६२-६४।।
व्रतं वैवस्वतं कुर्वन् शाकाहारो भवेन्नरः।
साध्यादृषीन्वसूंश्चैव पश्येत्सर्वानशेषतः ।।६५।।
विघ्नप्रशमनं प्रोक्तं सर्वमन्त्रविधिस्त्वयम्।
मध्ये ध्यायञ्जपेन्मन्त्रन्तत्त्वस्य हृदयस्य च ।।६६।।
सूर्य के व्रत में शाकाहार करना चाहिये। साध्य-ऋषि वसुगण तथा सबको सर्वतोभाव से देखे। इन सब मन्त्रों का विधान विघ्ननाशार्थ कहा गया है। बीच में ध्यान करे। तत्त्व तथा हृदय मन्त्र का जप भी करे।।६५-६६।।
दृढासनः स्थिरमना जितवायुर्जितेन्द्रियः।
मुख्यां सिद्धिमवाप्नोति तत्त्ववाजप्रसूतिजाम् ।।६७।।
इति श्रीसाम्बपुराणे एकषष्टितमेऽध्याये ज्ञानोत्तरे शरीरसाधनमष्टमं पटलम्
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दृढ़ासन, स्थिर मन, जितवायु तथा जितेन्द्रिय होकर तत्त्व तथा यज्ञ से मुख्य सिद्धि का लाभ करे।।६७।।
श्री साम्बपुराणोक्त इकसठवें अध्याय में ज्ञानोत्तर शरीर-साधन नामक अष्टम पटल समाप्त
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