साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 356, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ें३४२ श्रीसाम्बपुराणम्
अश्वानान्तु जपेन्मन्त्रं योगिनां च गतिं तथा।
निरुन्ध्याद्यद्यदीक्षेत व्रणव्याधिविषं च यत्॥१७॥
ध्यायँश्च होमयेन्नित्यं युक्तो मन्त्रार्चने नरः।
उद्घाटने च संहारे योज्यश्चापि दशात्मकः ॥१८॥
अश्व का मन्त्र जप करे। ऐसा करने से योगियों की गति तक का निरोध हो जाता है। यहाँ तक कि जो-जो देखा जायेगा, जो व्रण है, व्याधि अथवा विष है, सबका निरोध हो जायेगा। मन्त्र तथा अर्चन में लगा व्यक्ति ध्यान करके नित्य होम करे। उद्घाटन तथा संहार में भी ऐसे ही दशात्मक मन्त्र का प्रयोग करे।।१७-१८।।
सर्वत्र वेष्टनं कृत्वा ततः शान्तिं प्रयोजयेत्।
परमपुटमध्ये तु द्रव्यमन्त्रेण योजयेत्।
असन्देहेन सिद्ध्येत बद्ध्वा मन्त्रविभागशः ॥१९॥
इति श्रीसाम्बपुराणे ज्ञानोत्तरे द्विषष्टित्तमेऽध्याये नवमं पटलम्
सर्वत्र वेष्टन करे। तदनन्तर शान्ति प्रदान करे। परम पुट के मध्य में द्रव्य मन्त्र द्वारा युक्त करे। ऐसे मन्त्रविभाग से बन्धन करने पर निश्चय सिद्धि प्राप्त होती है।।१९।।
श्री साम्बपुराणोक्त सकल कार्यसिद्धि विधाननामक बासठवाँ अध्याय समाप्त