भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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पृष्ठ 359

चतुःषष्टितमोऽध्यायः

(मारणाभिचारः)

अभिचारविधिं श्रुत्वा मन्त्रः सर्वार्तिनाशनः।
अधःशूलान् ग्रहान् क्रूरान् भैरवांश्च महाबलान् ॥१॥
महामारी कुलोद्भूतानुत्सादयति मन्त्रवित्।
यमजिह्वां मृत्युभूतमघोरं चापि योजयेत् ॥२॥
प्राह्वनं तु महारौद्रं शत्रुपक्षभयंकरम्।
कुर्यात्तु कंटकं शालं याम्यां दिशिमुपाश्रितः ॥३॥

सबके लिये आर्तिनाशक मन्त्र अभिचार विधि को सुनकर मन्त्रवित् साधक अधःशूल, क्रूर ग्रह, महाबलशाली महामारी कुलोत्पन्न भैरव देव को उत्सारित करते हैं और यम की जिह्वारूप मृत्युस्वरूप अघोर को युक्त करते हैं। महारौद्र का आह्वान शत्रुपक्ष के लिये भयंकर है। दक्षिण दिशा का आश्रय लेकर कण्टक का शाल (चटाई) तैयार करे॥१-३॥

नैर्ऋत्यां वा श्मशाने वा त्रिकोणज्ञान्तमालिखेत्।
श्मशाने केशसंच्छन्ने कंटकैः सर्वतोवृते ॥४॥
द्वारं च कल्पयेत्तत्र कंटकैः कल्पितार्गलम्।
अन्त्रमालासमायुक्तं याम्यां दिशिमुपाश्रितम् ॥५॥
कपालैर्बहुभिश्चैव परितः परिवेष्टयेत्।
अग्न्यागारं त्रिकोणं च कल्पयेत्तत्र साधकः ॥६॥

नैर्ऋत्य कोण में अथवा श्मशान में त्रिकोण पद्म आदि का अंकन करे। केश आच्छादित श्मशान में सब दिशाओं में कण्टक द्वारा आवृत स्थान में द्वार की कल्पना करे तथा कण्टक द्वारा ही अर्गला तैयार करे। इसे दक्षिण दिशा की ओर अस्त्रमाला से युक्त होना चाहिये। नरकपाल से चारो दिशाओं को बाँधे (चारो दिशाओं में नर कपाल से वेष्टन करे)। साधक वहाँ अग्नि आगार तथा त्रिकोण की कल्पना करे॥४-६॥

रुधिराक्तेन सूत्रेण परितः परिवेष्टयेत्।
श्मशानभस्मना स्नातः कृष्णवासा जितेन्द्रियः ॥७॥
रक्तोष्णीषधरो मन्त्री रक्तयज्ञोपवीतवान्।
संक्रुद्धय भुकुटी वक्त्रो रक्तचन्दनशूलधृक् ॥८॥