साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 360, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ें३४६ श्रीसाम्बपुराणम्
रक्तलिप्त सूत्र से चतुर्दिक वेष्टन करना चाहिये श्मशान भस्म से स्नान करके कृष्ण (काला) वर्ण वस्त्र पहनकर जितेन्द्रिय साधक लाल रंग की पगड़ी तथा लाल यज्ञोपवीत धारण करके क्रुद्ध होकर भृकुटी बद्ध मुख करके रक्त चन्दन से लिप्त शूल धारण करे।।७-८।।
पुष्पं लोहमयं चापि धारयेच्छूलमुत्तमम्।
खदिरं रुधिराक्तं वा धारयेच्चाभिचारवान् ।।९।।
तदनन्तर पुष्प तथा लोहमय उत्तम शूल धारण करके अथवा अभिचारयुक्त होकर रुधिराक्त खदिर धारण करे।।९।।
अग्न्यागारस्य मध्ये तु प्रतिमाङ्कारयेद्बुधः।
शत्रोर्मूत्रपुरीषेण रुधिरेणान्त्रपांशुना ।।१०।।
पादपांशुं समालोड्य मूर्द्धस्मासानकी तथा।
बल्मीकसम्भवां चापि गृहीत्वा शत्रुमालिखेत् ।।११।।
बुद्धिमान व्यक्ति अग्निगृह के मध्य में शत्रु की प्रतिमा स्थापित करे तथा उसे शत्रु की मूत्रविष्ठा-रक्त तथा अन्त्र (आँत) पांशु से उसे लिप्त करे। ऐसे ही दीमक के बाबी की मिट्टी तथा भस्म से शत्रु को अंकित करे।।१०-११।।
खादिरैः कीलकैस्तस्य ऊर्ध्वकेशमधोमुखम्।
पाशेन वेष्टयित्वा तु शत्रोः प्राणान्निक्कृन्तयेत् ।।१२।।
खैर की लकड़ी की कील से शत्रु के ऊर्ध्वकेश तथा नीचे किया मुख पाश द्वारा वेष्टित करके शत्रु का प्राण-हरण करे।।१२।।
कुर्याच्छूलेन भिन्नं तु पादयोर्मूर्ध्नि विद्विषम्।
आयसस्रुवमादाय सोमं कुर्याद्विचक्षणः ।।१३।।
शत्रु (की प्रतिमा) का पादद्वय एवं मस्तक शूल से छिन्न करे। विचक्षण व्यक्ति लोहे के स्रुव द्वारा होम करे।।१३।।
अथ चेद्दशधा प्रोक्तमभिचारविधाविह।
कृष्णाच्छागोष्ट्रमातङ्गशलभानां च शोणितम् ।।१४।।
विषं च मलिनं तैलं चातुर्वर्णस्य शोणितम्।
वामहस्ते स्रुवं कृत्वा दक्षिणाभिमुखः स्थितः ।।१५।।
त्रिसंध्यं जुहुयात्क्रुद्धः फट्कारेणैव मन्त्रवित्।
कपालत्रयमारूढः द्वयोः पादौ निवेशयेत् ।।१६।।
तदनन्तर दश प्रकार की आभिचारिक विधि कही गयी है। कृष्णवर्ण का बकरा, ऊँट, हस्ती तथा शलभ का रक्त एवं विष, मलिन तैल तथा चार वर्ण के मनुष्य का रक्त, वाम