साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
पृष्ठ 375, कुल 424 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टषष्टितमोऽध्यायः ३६१
महातपस्वी च जितेन्द्रियश्च न चान्यभक्तश्च महेश्वरादसौ । विद्यासु तत्त्वेषु महास्थितिंश्च प्राप्नोति विद्याधरमुक्तलक्ष्मीम् ॥४७॥
जो महातपस्वी, जितेन्द्रिय हैं, महेश्वर के ही भक्त हैं, वे विद्या तथा तत्त्वसमूहं की महास्थिति का तथा विद्याधरत्व का ऐश्वर्य प्राप्त करते हैं॥४७॥
दशात्मकं तु तं बुद्ध्वा बीजतत्त्वन्तु कृत्स्नतः। नियोगं पदबीजानां बुद्धिसिद्धिं यथोदिताम् ॥४८॥
उसे दशात्मक जान लेने पर समग्र भाव से बीजतत्त्व तथा पदबीज में नियोग होता है। यथोदित बुद्धिसिद्धि प्राप्त होती है॥४८॥
सर्वमन्त्रात्मका देवाः सर्वदेवाः शिवात्मकाः। शिवतन्त्रपदैर्बीजैः कालकालकृपादिभिः। बुद्ध्या सम्यग्यथान्यायं सिद्धिं चाशु प्रवर्तते ॥४९॥
इति श्रीसाम्बपुराणे ज्ञानोत्तरे अष्टषष्टितमेऽध्याये सर्वसामान्यसाधनं नाम पञ्चदशं पटलम्
सभी देवगण मन्त्रात्मक हैं। सभी देवता शिवात्मक हैं। शिवोक्त तन्त्रोक्त बीज तथा काल में महादेव की कृपा से बुद्धि की सहकारिता से यथान्याय सिद्धि की शीघ्र प्राप्ति होती है॥४९॥
श्रीसाम्बपुराणान्तर्गत ज्ञानोत्तर अड़सठवें अध्याय में सर्वसामान्य-साधन नामक पन्द्रहवाँ पटल समाप्त