साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंएकोनसप्ततितमोऽध्यायः ३६५
मुहूर्त्ताद्र्द्धार्द्धमात्रेण मन्त्रबीजकलादिभिः ।
दिवार्र्द्धं रविभागेन देही बिन्दति तत्क्षणात् ॥२२॥
मुहूर्त काल के आधे के आधे में मन्त्र, बीज तथा कला के द्वारा दिन के अर्द्धभाग रविभाग के द्वारा देही तत्क्षण उस सम्पत्ति को पाता है॥२२॥
प्राकृतानि च तत्त्वानि प्रकृत्या प्रकृतानि वै।
तीव्रं तत्त्वं परं सूक्ष्मं मन्त्रात्मा पञ्चविंशकम् ॥२३॥
तीव्रस्यात्मनि तत्त्वज्ञो योगवान् योगपण्डितः ।
अचिराल्लभते शान्तिं देही तत्त्वेन यो हितः ॥२४॥
तत्त्वसमूह प्राकृत हैं। प्रकृति द्वारा (तत्त्वसमूह) प्रस्तुत ये तीव्र तत्त्व परमसूक्ष्म, मन्त्रात्मा २५ हैं। आत्मा में तीव्रतत्त्व से अभिज्ञ योगयुक्त देही तत्त्वों से युक्त होकर शीघ्र शान्ति-लाभ करता है॥२३-२४॥
धारणात्ससततं योगो जपध्यानादिदीपितः ।
योजयंस्तु परं योज्यं लिलिहेत्पत्रमव्ययम् ॥२५॥
जप, ध्यानादि से दीप्त होकर निरन्तर धारणा योग से परम योज्य वस्तु में चित्त को युक्त करके अव्यय पत्र का लेहन करे॥२५॥
एवंगुणविशिष्टस्तु योजयेत्तत्त्वमण्डलम् ।
अगुणस्त्वेव योज्यः स्यान्मन्त्री विद्येश्वर्रादृते ॥२६॥
इति श्रीसाम्बपुराणे तत्त्वमण्डलवर्णनं नाम एकोनसप्ततितमोऽध्यायः
ऐसा गुणयुक्त होकर तत्त्वमण्डल को युक्त करे। इससे साधक विद्येश्वर से व्यतीत (सगुण से परे) अगुण (निर्गुण) से युक्त हो जाता है॥२६॥
श्रीसाम्बपुराण में तत्त्वमण्डल-वर्णन नामक उनहत्तरवाँ अध्याय समाप्त