साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३७४ श्रीसाम्बपुराणम्
योनिस्तु तेजसोऽम्भः स्याद् भूतये सर्वदेहिनाम्।
कादयस्त्वग्निवर्णानां प्रभवाय महात्मनाम्॥१२॥
योनिराग्नेयी।
सभी देहधारीगण के मंगलार्थ तेज की जलरूप (आग्नेयी) योनि है। कादि, अग्निवर्णा है तथा महात्मा गण की सृष्टि के लिये यह योनि है। यह है—आग्नेयी योनि॥१२॥
आकाशादिः गुणाकाराः शब्दाश्च बीजयोनयः।
सृष्टये शब्दरूपाणां कालादिवरताविधिः ॥१३॥
आकाशात्मिकायोनिः।
आकाश गुणयुक्त शब्दसमूह बीजयोनिसमूह शब्दरूप की सृष्टि के लिये कालादि श्रेष्ठ विधि है। यह है—आकाशात्मिका योनि॥१३॥
भूतानां परमां योनिं भकारादि तथा परा।
वाङ्मयस्य च सिद्ध्यर्थं भूतयोनिं विधापयेत् ॥१४॥
भूतसंहारयोनिः।
प्राणिसमूह की परमयोनि तकारादि अपरा है। वाङ्मय की सिद्धि हेतु भूतयोनि का प्रयोग करना चाहिये। यह है—भूतसंहार योनि॥१४॥
द्वादशे ते तु विन्यस्य चत्वारो यमसंज्ञकाः।
विषमं परमं देवं य एवं ध्येयमीश्वरम् ॥१५॥
नपुंसकयोनिः।
द्वारदेश में चार यमसंज्ञक का स्थापन करे तथा इस प्रकार विषम परमदेवता ईश्वर का ध्यान करे। यह है—नपुंसक योनि॥१५॥
विश्वयोनिरतोऽन्यस्याः सर्वज्ञा विश्वसृक्पराः।
द्वारपालनमस्कारवर्णा उक्ता ससंज्ञिता ॥१६॥
नमो नमो भवेन् मध्ये तत्त्वस्य प्रणवस्य तु।
एवं दीपितमेतत्तु विश्वसृग् भूतये मतम् ॥१७॥
विश्वयोनिः।
विश्वयोनि है अपर की स्रष्टा। सर्वज्ञ, विश्व सृजन-परायण। नाम के साथ द्वारपाल नमस्कार वर्णसमूह कहे गये हैं। प्रणव तत्त्व के मध्य में नमः नमः शब्द रहता है। इस प्रकार से दीपित होकर विश्वसृष्टि के मंगलार्थ पूजित होती है। यह है विश्वयोनि॥१६-१७॥