भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः ३७७

श्मशान में सर्वभूतों द्वारा सकलीकृत देखे। दर्भपुञ्ज (कुश आदि के गुच्छे के ऊपर) ७ भाग में स्थापित करे। वहाँ से अन्यत्र स्थापित घृतादि से पूजित शिष्य को तीन बार पवित्र कराये। नाभि के ऊपर तथा पञ्जर के नीचे यथाक्रमेण सभी प्राणियों के लिये आहुति देनी चाहिये। शिष्य में सम्पात पातन करे। इससे वह दोषरहित हो जाता है॥६-८॥

सकलीकृत्य पश्चाच्च यजेच्चापि पुनः शुचिः।
संस्थाप्य दक्षिणेनाग्नेर्भूतैर्हुत्वा च किल्विषम्॥९॥
भस्ममुष्टिं ततस्तस्मिन् दद्यादादाय पावकम्।
एवं समयिनस्तस्य भवेत् संस्कारयोग्यता॥१०॥

इति श्रीसाम्बपुराणे ज्ञानोत्तरे बीजप्रसवे पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः

सब एकत्र करके पवित्र होकर पुनः यजन करना चाहिये। अग्नि को दक्षिण में स्थापित करके भूत द्वारा पापों की आहुति देकर उसमें भस्ममुष्टि छोड़कर अग्नि ग्रहण करे। ऐसे नियमपालक में संस्कार-योग्यता होती है॥९-१०॥

श्रीसाम्बपुराण ज्ञानोत्तर में बीजप्रसव नामक पचहत्तरवाँ अध्याय समाप्त