भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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षट्सप्ततितमोऽध्यायः

(बीजप्रसवः)

योग्यतामप्यबुद्ध्वस्य संस्कारं गुरुरारभेत्।
भूतस्य पावनेरेव तस्य सम्पूज्य तत्त्वतः॥१॥
संहारशक्तिमावाह्य विधानेन दशात्मना।
आत्मानं सकलीकृत्य शिष्ये न्यासान् प्रयोजयेत्॥२॥

शिष्य की योग्यता को भली प्रकार जानकर गुरुदेव संस्कार प्रारम्भ करे। भूतसमूह को पावन करके तत्त्वतः उसका पूजन करना चाहिये। दशात्मक विधान से संहार शक्ति का आवाहन करके आत्मा को एकत्र करके शिष्य का न्यास करे (आत्मा को एकत्र करना अर्थात् विक्षिप्त आत्मभाव का केन्द्रीयकरण)॥१-२॥

कृत्वा पूजादिकां सम्यक् प्रतिमन्त्रं प्रयोजयेत्।
सृष्टन्तु पावकं कर्म यद्यसौ प्रतिपद्यते॥३॥

पूजादि करके सम्यक् रूप से प्रतिमन्त्र का प्रयोग करना चाहिये। यदि वह प्रतिपाद्य हो तब सृष्ट होकर पावक कर्म करना चाहिये॥३॥

ब्रह्मघ्नं शोधयेद् गोष्ठं दशाहं पापशुद्धये।
अन्येष्वप्सु त्रिरात्रञ्च महासर्गेषु तत्त्ववित्॥४॥

ब्रह्महत्यारे की शुद्धि हेतु १० दिन वह गोष्ठ (गौशाला) में रहकर शोधन करे। तत्त्वज्ञ व्यक्ति अन्य जल एवं महत् के साथ तीन रात्रि शोधन करे॥४॥

प्रत्येकमाहुतीस्तिस्रो हुत्वा सम्पातकारणम्।
संस्थितो दक्षिणेनाग्नेः क्रमेण लभते गुरुः॥५॥

प्रत्येक की तीन आहुति देकर अग्नि के दक्षिण से लेकर गुरुक्रम से सम्पात-पारण लाभ करे॥५॥

गुरुणाष्टशतं हुत्वा सम्पात्यास्त्वेकविंशतिः।
सम्पातो मूर्ध्नि शिष्यस्य शिवयोन्यां तथाञ्जलिम्॥६॥
पुष्पस्य मूर्ध्नि दद्याच्च क्रियायोन्याञ्च निःक्षिपेत्।
दर्भे दशात्मना होमस्त्रिकमेतन्मयोदितम्॥७॥