साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंषट्सप्ततितमोऽध्यायः ३७९
गुरु १०८ आहुति देकर २१ सम्पात करे। शिष्य के मस्तक में सम्पात देकर शिवयोनि में पुष्पाञ्जलि देनी चाहिये। तदनन्तर मस्तक में तथा क्रियायोनि में पुष्पाञ्जलि प्रदान करे। दर्भ में दशात्मक विधान से तीन बार होम करे। यह मेरी उक्ति है॥६-७॥
तथा पुंसवनं कृत्वा क्रियायोन्यैश्च मन्त्रिणः। तथैव तण्डुलैर्जुहुयादाहुतिं त्वेकविंशतिम् ॥८॥ जातकर्म तथैव स्यात्तोयं मूर्ध्नि दशात्मना। तथा व्याहृतिहोमश्च पानं चास्य मलापहम् ॥९॥
तदनन्तर मन्त्रसाधक क्रियायोनि के द्वारा पुंसवन करे तथा तण्डुल से २१ आहुति प्रदान करे। इस प्रकार से जातकर्म होता है। दशात्मक विधान से मस्तक पर जल देना, व्याहृति होम करना तथा इस जल के द्वारा आचमन मलिनता का नाशक होता है॥८-९॥
हिरण्यगर्भस्योक्तायाः क्रियायोन्यसितं परम्। हुत्वा प्रशमयेच्चैव मधुना च समायुतम् ॥१०॥ ये चापि शिष्टसंस्काराः प्राशनाद्या व्रतान्तकाः। कृष्णाजिनादिलिङ्गानि दद्यादस्य दशात्मना ॥११॥
हिरण्यगर्भोक्त मन्त्र से क्रिया योनि में मधु से होम करके प्रशमन करना चाहिये। ये सभी शिष्ट संस्कार हैं। अन्नप्राशादि व्रतान्त में कृष्णाजिन प्रभृति दशात्म विधि से इस शिष्य को प्रदान करे॥१०-११॥
होमं कारणयोन्यां च कुर्यान्नित्यं समाहितः। सप्त सप्त तथा हानिं चरेत् सप्त व्रतानि वै ॥१२॥ सम्पातनयनां चाद्यां तथा वै कारणस्य तु। कर्म वैवाहिकं चैव वररूपाय यज्ञवान् ॥१३॥ यागवांश्च हविर्यज्ञैः सोमपानं यथोच्यते ॥१४॥
समाहित होकर नित्य कारण योनि में होमकार्य उचित है। ७-७ दिन ७ व्रत का आचरण करना चाहिये। कारण का सम्पातनयन प्रदान करे। यज्ञवान व्यक्ति वररूप के उद्देश्य से वैवाहिक कर्म करे। यागयुक्त व्यक्ति हवि से यज्ञ करे। तदनन्तर सोमपान कहा गया है॥१२-१४॥
सोममौदुम्बरे न्यस्तं नमस्ये तं दशात्मना। दशसम्पातितं पीत्वा ऋतुभिर्युज्यते तदा ॥१५॥
सोम को उदुम्बर काष्ठपात्र में रखकर दशात्मक विधान से उसे नमस्कार करना चाहिये। १० सम्पातित पान करके याग करे॥१५॥