साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
DevanagariHindipublished424 पृष्ठ
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| ३८० | श्रीसाम्बपुराणम् |
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दक्षिणां तद्विदे दद्याद् देवायेनं निवेदयेत्।
गुरुं प्रदक्षिणीकृत्य लब्धानुज्ञो यथाविधिः ॥१६॥
एवं तु संस्कृतो योग्यः सिद्धीनां सर्वतस्ततः।
मृतश्च मोक्षमाप्नोति विशेच्च परमं पदम् ॥१७॥
इति श्रीसाम्बपुराणे ज्ञानोत्तरे बीजप्रसवे षट्सप्ततितमोऽध्यायः
यज्ञविद् लोगों को दक्षिणा देनी चाहिये। देवता के उद्देश्य से यह निवेदन होता है। गुरुदेव की यथाविधि प्रदक्षिणा करके उनकी अनुमति लेनी चाहिये। ऐसे भाव से संस्कृत होने पर सब दिक् से साधक सिद्धिलाभ के लिये योग्य हो जाता है। उसे मृत्यु के उपरान्त मोक्षलाभ तथा परमपद मिलता है॥१६-१७॥
श्रीसाम्बपुराण ज्ञानोत्तर में बीजप्रसव नामक छिहत्तरवाँ अध्याय समाप्त