साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअशीतितमोऽध्यायः ३८९
शिव तथा अग्नि विचरण करते हैं। वे समस्त प्राणीगण के क्षयकारक हैं। तत्पश्चात् हृदयउसमें मिलित हो जाते है। उष्मा शरीर को दग्ध कर देती है। यह परमेष्ठी का ऊष्म मन्त्र है। हृदय दह्यमान हो जाने पर मन्त्री मानरहित हो जाता है॥७-८॥
नात्मना विशयेदस्त्रं विसर्गास्त्रमकारजम्। द्वाराणां शीर्षरापानां विधाना च व्युपस्थितः ॥१९॥
आत्मा द्वारा अस्त्र प्रवेश न कराये (?) विसर्गान्त मकारजात है (इस श्लोक में आगे अर्थ अस्पष्ट है अतः बाकी का अनुवाद करने में असमर्थता है)॥१९॥
भित्वा मूर्ध्नि कपालं तु विधिना व्ययमीश्वरम्। यं प्राप्य न निवर्तेत योगिनः परमं शिवम् ॥२०॥
इति श्रीसाम्बपुराणे ज्ञानोत्तरे अशीतितमोऽध्यायः
तदनन्तर मार्ग रुद्ध हो जाने पर वह्नि यज्ञशत का विनाश करती है। मस्तक में कपाल भेदन करके अव्यय ईश्वर में प्रवेश मिलता है। जो परा शिव को प्राप्त कर लेते हैं, वे योगी पुनः जन्म ग्रहण चक्र से मुक्त हो जाते हैं॥२०॥
श्री साम्बपुराणोक्त ज्ञानोत्तर में मुक्तिमार्ग नामक अस्सीवाँ अध्याय समाप्त