साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)
Samba Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा
स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंद्वादशोऽध्यायः ६७
ततः कृतैः करपुटैः पद्मकेशरसंयुतैः ।
ललाटोपरि विन्यस्तैः प्रणेमुः सर्वदेवताः ॥२५॥
तत्पश्चात् तन्त्री, वीणा, वेणु-प्रभृति, दर्दुर, पणव, पुष्कर, मृदंग, पटह, देव-दुन्दुभि, शत-सहस्र शङ्ख बजाये गये। गन्धर्वगण गायन करने लगे, अप्सरागण नृत्य करने लगीं। तूर्य वादित्र शब्द की ध्वनि से कोलाहल होने लगा। तदनन्तर पद्म-केसरयुक्त करपुट का ललाट में विन्यास करके समस्त देवगण ने भगवान् सूर्य को प्रणाम किया।।२२-२५।।
ततः कोलाहले तस्मिन् सर्वदेवसमागमे ।
तेजसः शातनं चक्रे विश्वकर्मा शनैः शनैः ॥२६॥
समस्त देवगण-कृत इस कोलाहल के मध्य में विश्वकर्मा धीरे-धीरे सूर्यदेव के तेज को खण्ड-खण्ड छेदित करने लगे।।२६।।
इति हिमजलघर्मकालहेतो हरकमलासन विष्णुसंस्तुतस्य ।
तनुपरिलिखनं निगद्य भानोर्व्रजति दिवाकरलोकमायुषोऽन्ते ॥२७॥
इति श्रीसाम्बपुराणे सूर्यस्य शरीरलिखनं नाम द्वादशोऽध्यायः
हिम, जल तथा ताप और काल के जो कारण हैं, ब्रह्मा विष्णु से जो संस्तुत हैं, उन सूर्य की मसृणता का जो सम्पादन करते हैं (पाठ करते हैं), वे आयु-समाप्ति के अनन्तर सूर्यलोक प्राप्त करते हैं।।२७।।
श्री साम्बपुराण का श्रीसूर्य शरीर-मसृणता-सम्पादन नामक द्वादश अध्याय समाप्त