भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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भाव यह है कि भले ही हम किसी श्रेष्ठ भाषा में पारंगत हों, पर दूसरी अन्य भाषाओं को जानने और समझने के लिए हमें सदा प्रयत्नशील रहना चाहिए। इससे ज्ञान बढ़ता है। अन्नाद् दशगुणं पिष्टं पिष्टाद् दशगुणं पयः। पयसोऽष्टगुणं मांसं मांसाद् दशगुणं घृतम्॥ अन्न की अपेक्षा उसके चूर्ण अर्थात पिसे हुए आटे में दस गुना अधिक शक्ति होती है। दूध में आटे से भी दस गुना अधिक शक्ति होती है। मांस में दूध से भी आठ गुना अधिक शक्ति होती है और घी में मांस से भी दस गुना अधिक बल है॥19॥ अतः मांस खाने वालों को घृत के सेवन का अभ्यास डालना चाहिए। आज दालें तथा सूखे मेवे भी मांस की पूर्ति कर सकने में समर्थ हैं। उनमें भी प्रोटीन काफी मात्रा में मिलता है। शाकेन रोगा वर्द्धन्ते पयसा वर्द्धते तनुः। घृतेन वर्धते वीर्यं मांसान्मांसं प्रवर्धते॥ • साग खाने से रोग बढ़ते हैं, दूध से शरीर बलवान होता है, घी से वीर्य (शक्ति) बढ़ता है और मांस खाने से मांस ही बढ़ता है॥20॥ अतः बल-बुद्धि और शक्ति के लिए घी-दूध का सेवन ही उत्तम है, मांस नहीं। साग-सब्जी से रोग तभी बढ़ते हैं, जब उन्हें अच्छी प्रकार से धोकर शुद्ध नहीं कर लिया जाता। शुद्ध न करने पर उसमें बाह्य कीटाणु रह जाते हैं, जो रोग बढ़ाते हैं। 117