सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचिन्तामणि पत्थर है, सूर्य तीक्ष्ण किरणों वाला है, चन्द्रमा क्षीण होता रहता है, समुद्र खारा है, कामदेव अनंग (बिना शरीर का) है, राजा बलि दैत्यपुत्र है और कामधेनु पशु है। ये सभी उत्तम हैं, परंतु मैं जब आपकी तुलना करता हूं प्रभु! तो आपकी किससे उपमा करूं, यह मेरी समझ में नहीं आता, अर्थात प्रभु! आपकी उपमा तो किसी से भी नहीं दी जा सकती। यह रामोपासना का सुंदर श्लोक है।।16।। आचार्य चाणक्य ने प्रस्तुत श्लोक में भगवान राम के प्रति अपार श्रद्धा प्रकट की है। ईश्वर अपरम्पार है, उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। विनयं राजपुत्रेभ्यः पण्डितेभ्यः सुभाषितम्। अनृतं द्यूतकारेभ्यः स्त्रीभ्यः शिक्षेत् कैतवम्॥ राजपुत्रों से नम्रता, पंडितों से मधुर वचन, जुआरियों से असत्य बोलना और स्त्रियों से धूर्तता सीखनी चाहिए।।17।। आचार्य चाणक्य ने प्रस्तुत श्लोक के माध्यम से बताया है कि राजपुत्रों में अपने पिता के संस्कारस्वरूप नम्रता के गुण आते हैं, पंडितों में बोलने का उत्तम ढंग मिलता है, इन्हें सीखने के रूप में इंसान को अपनाना चाहिए। अनालोक्य व्ययं कर्ता ह्यनाथः कलहप्रियः। आतुरः सर्वक्षेत्रेषु नरः शीघ्रं विनश्यति॥ बिना विचार के खर्च करने वाला, अकेले रहकर झगड़ा करने वाला और सभी जगह व्याकुल रहने वाला मनुष्य शीघ्र ही नष्ट हो जाता है।।18।। प्रस्तुत श्लोक में आचार्य चाणक्य ने अनेक उपयोगी बातें बताई हैं। उनके अनुसार आय के अनुसार ही खर्च करना चाहिए। जितनी चादर हो उतने ही पैर फैलाने चाहिए। अकेले में 135 CC0. Vashishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri