सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
DevanagariHindipublished196 पृष्ठ
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कल्याण नहीं होता। जीवन नष्ट हो जाता है।।19।। बिना धर्म और गुरु उपदेश के मानसिक सुख मृतप्राय है और बिना अन्न और धन के जीवन का भौतिक आधार नष्ट हो जाता है। त्यज दुर्जनसंसर्गं भज साधुसमागमम्। कुरु पुण्यमहोरात्रं स्मर नित्यमनित्यताम्॥ दुष्टों का साथ त्यागो, सज्जनों का साथ करो, रात-दिन धर्म का आचरण करो और प्रतिदिन इस अनित्य संसार में नित्य परमात्मा के विषय में विचार करो, उसे स्मरण करो।।20।। सद्संगति और धर्माचरण करते हुए नित्य परमात्मा को याद करना चाहिए और इस संसार की नश्वरता को समझना चाहिए। सद्संगति के सामने दुष्टों का साथ कुछ भी नहीं है। 153