भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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॥ अथ षोडश अध्याय ॥

न ध्यातं पदमीश्वरस्य विधिवत्संसारविच्छित्तये, स्वर्गद्वारकपाटपाटनपटुर्धर्मोऽपि नोपार्जितः। नारीपीनपयोधरोरुयुगलं स्वप्नेऽपि नालिंगितं, मातुः केवलमेव यौवनवनच्छेदे कुठारा वयम्॥ संसार से उद्धार के लिए जिन लोगों ने विधिपूर्वक परमेश्वर का ध्यान नहीं किया, स्वर्ग में समर्थ धर्म का उपार्जन नहीं किया, स्वप्न में भी किसी सुंदर युवती के कठोर स्तनों और जंघाओं के आलिंगन का भोग नहीं किया, ऐसे व्यक्ति का जन्म माता के यौवन रूपी वन को काटने वाली कुल्हाड़ी के समान है॥1॥ भाव यह है कि जिन लोगों ने न तो इस भौतिक संसार का ही उपयोग किया और न परलोक को सुधारने के लिए ईश्वरोपासना तथा धर्म का ही संग्रह किया, ऐसे लोगों को जन्म देना माता के लिए व्यर्थ ही हुआ। सफलता तो तभी मिलती है, जब इस लोक में सुख उठाते हुए परलोक-सुधार के लिए धर्माचरण किया जाए।

163 CC0. Vasishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri